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सरकारी स्कूल पर मस्जिद जैसी मीनारें, झारखंड में क्या है नया विवाद; भड़के हिंदूवादी

हजारीबाग की घटना ने तूल पकड़ लिया है। भाजपा के साथ विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठन एक बार फिर झारखंड सरकार पर स्कूलों के इस्लामीकरण की छूट देने का आरोप लगाकर आक्रामक हैं।

सरकारी स्कूल पर मस्जिद जैसी मीनारें, झारखंड में क्या है नया विवाद; भड़के हिंदूवादी
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,हजारीबागThu, 29 Feb 2024 01:03 PM
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठन एक बार फिर झारखंड सरकार पर स्कूलों के इस्लामीकरण की छूट देने का आरोप लगाकर आक्रामक हैं। पिछले कई दिनों से हिंदूवादी संगठन आक्रोशित हैं। पूरा बवाल उस वक्त शुरू हुआ जब झारखंड के हजारीबाग से एक सरकारी स्कूल पर मस्जिद जैसी मीनार बनाने की बात सामने आई। स्थानीय अखबारों में खबरें छपीं तो मामला तूल पकड़ते हुए प्रदेश स्तर तक उठा। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार को घेरते हुए इसे तुष्टिकरण का परिणाम बताया है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद है क्या। 

हजारीबाग के इचाक में एक सरकारी उर्दू स्कूल है, राजकीय कृत प्राथमिक उर्दू विद्यालय, डुमरौन। 1976 से चल रहे इस स्कूल में अभी 52 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। पिछले महीने के अंत में स्कूल के मेन गेट पर दो मीनार का निर्माण शुरू किया गया। करीब 35 फीट ऊंची मीनारों का निर्माण किया जा चुका है। मामले ने तब तूल पकड़ा जब पिछले 5-6 दिनों से स्थानीय अखबारों में खबरें प्रकाशित होने लगीं। सरकारी स्कूल पर मस्जिद जैसी मीनारें बनाए जाने की खबरें जंगल में आग की तरह फैलीं तो हिंदुवादी संगठनों को सरकार पर हमलवार होने का एक और मौका मिल गया। रविवार को कुछ लोगों ने निर्माण स्थल के सामने धरना प्रदर्शन किया। धरने में शामिल लोगो ने अवैध निर्माण को तत्काल हटाने और प्रधानाध्यापक नौशाद आलम सीआरपी और एसएमसी अध्यक्ष के खिलाफ ऐक्शन की मांग की। आक्रोशित ग्रामीणों ने डीसी को भी आवेदन दिया है। डीसी को सौंपे आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि विद्यालय सरकारी है। जिस पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य विभागीय आदेश के बिना कराया जाना अनुचित है।  

निजी जमीन होने का दावा
स्कूल के प्रवेश द्वार पर मीनार बनवाने वाले स्थानीय लोगों का दावा है कि यह उनकी निजी जमीन है। कागजात दिखाते हुए वह दावा करते हैं कि सरकारी स्कूल निजी जमीन पर निर्मित है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'हमने यह प्रॉपर्टी सरकार को लिखित रूप में नहीं दी है, इसलिए यहां हम अपना धार्मिक कार्य करते रहेंगे।'

सीओ ने किया स्कूल का निरीक्षण  
शनिवार को इचाक के सीओ रामजी प्रसाद ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत की। सीओ ने पंचायत समिति सदस्य और ग्रामीणों से बात की और उनका पक्ष जाना। बताया कि प्रथम दृष्टया यह निर्माण अवैध दिख रहा है। इसकी जांच रिपोर्ट संबिधित वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इचाक के बीईओ कार्यालय ने स्कूल के प्रधानाध्यापक नौशाद आलम और सीआरपी दीपक कुलकर्णी से स्पष्टीकरण पूछा था। साथ ही प्रखंड शिक्षा प्रसार कार्यालय से स्थानीय थाने को आवेदन देकर प्रधानाध्यापक और सीआरपी पर कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। ताकि कानून-व्यवस्था ना बिगड़े। 

पहले भी हो चुका विवाद
हजारीबाग के स्कूल में हुए विवाद की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है। लोग इसे पिछले साल झारखंड के कई स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी और प्रार्थना में किए गए बदलावों की घटना से जोड़ रहे हैं। 

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