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झारखंड के इंडिया गठबंधन में नहीं है 'ऑल इज वेल', सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं; इनपर जारी है खींचतान

झआरखंड के इंडिया गंठबंध में सबकुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस, झामुमो और राजद अधिक से अधिक सीटों पर लड़ने के लिए दांव लगा रहे हैं। अब तक सभी 14 लोकसभा सीट का फार्मूला तय नहीं हो पाया है।

झारखंड के इंडिया गठबंधन में नहीं है 'ऑल इज वेल', सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं; इनपर जारी है खींचतान
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,रांचीFri, 12 Apr 2024 08:27 AM
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लोकसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग को लेकर झारखंड के इंडिया गठबंधन के अंदर दूर से भले ही सब ऑल इज वेल दिख रहा है, लेकिन कांग्रेस, झामुमो और राजद अधिक से अधिक सीटों पर लड़ने के लिए दांव लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार इंडिया गठबंधन के अंदर अब तक सभी 14 लोकसभा सीट का फार्मूला तय नहीं हो पाया है, लेकिन कांग्रेस सात, झामुमो पांच और राजद व वामदल एक-एक पर लड़ेंगे। ऐसी बातें सामने आई हैं। गठबंधन दलों के शीर्ष नेताओं की जुबां पर भी यही फार्मूला रहा है, लेकिन आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है।

दूसरी ओर जिन सीटों पर जिच नहीं उन पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया गया है। कांग्रेस ने अब तक तीन सीटों खूंटी, लोहरदगा और हजारीबाग से उम्मीदवारों का ऐलान किया है। दूसरी ओर झामुमो ने चार सीटों सिंहभूम, दुमका, राजमहल और गिरिडीह से प्रत्याशी दिया है। राजद ने पलामू और वामदल में भाकपा माले से विनोद सिंह कोडरमा के रण क्षेत्र में उतरे हैं।

उम्मीदवारों को उतारने तक गठबंधन के अंदर सब कुछ सही दिख रहा है, लेकिन यह भी सच है कि झामुमो की ओर से कांग्रेस पर सीट की अदला-बदली को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जमशेदपुर सीट के बदले झामुमो को गोड्डा लोकसभा सीट चाहिए। इसी तरह राजद को भी पलामू के अलावा चतरा सीट चाहिए। चतरा से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कई दमदार नेता लाइन में खड़े हैं। इनमें से कुछ नेता कांग्रेस के संपर्क में भी हैं।

झामुमो ने लोहरदगा सीट पर अपना दावा नहीं छोड़ा

झामुमो ने लोहरदगा सीट पर अपना दावा नहीं छोड़ा है। वो अब भी कांग्रेस को अपना घोषित उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह कर रहा है। दरअसल इस सीट से झामुमो विधायक चमरा लिंडा ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। ऐसे में इस सीट पर गठबंधन से एक उम्मीदवार का होना मुश्किल है। सीटों को लेकर हो रही खींचतान के बीच कांग्रेस बहुत ज्यादा पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही है। अगर आपसी सहमति से सीट शेयरिंग का फार्मूला तय नहीं हुआ तो कांग्रेस भी झामुमो की सीट पर अपने बागी नेताओं को चुनावी मैदान में उतरने का इशारा कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मुकाबला रोमांचक हो जाएगा।