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सीएम बनने के बाद कल्पना सोरेन की राह में कितनी बाधाएं, चुनाव आयोग के पाले में होगी गेंद

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। ऐसे में हेमंत सोरेन के सामने क्या विकल्प हैं। यदि कल्पना सोरेन को सीएम पद सौंपा जाता है तो उनकी राह में क्या होंगी बाधाएं।

सीएम बनने के बाद कल्पना सोरेन की राह में कितनी बाधाएं, चुनाव आयोग के पाले में होगी गेंद
Krishna Singhलाइव हिन्दुस्तान,रांचीWed, 31 Jan 2024 07:53 PM
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झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन से ईडी की पूछताछ के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दो टूरिस्ट मिनी बसें सीएम आवास में दाखिल हुई हैं। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि गिरफ्तारी की स्थिति में झामुमो की ओर से हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को सीएम पद सौंपा जा सकता है। इसके लिए विधायकों को इन्हीं बसों के जरिए राजभवन ले जाया जा सकता है। ताकि बहुमत की ताकत को नुमाया किया जा सके। इस रिपोर्ट में जानें सीएम हेमंत सोरेन के सामने आगे कौन से विकल्प हैं।  

कल्पना सोरेन को सौंपी जा सकती है सूबे की कमान?
हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को सीएम पद सौंप सकते हैं। कल्पना सोरेन को सीएम पद सौंपे जाने की राह में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कल्पना मौजूदा विधायक नहीं हैं। हाल ही में झामुमो के गांडेय विधायक सरफराज अहमद ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। इसे कल्पना के चुनाव लड़ने के लिए सीट खाली करने के रूप में देखा गया था। चूंकि कल्पना मूल रूप से ओडिशा की हैं, इसलिए नियम उन्हें झारखंड में आदिवासी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देते हैं।

चुनाव आयोग के पाले में होगी गेंद
एक सूत्र ने बताया कि अल्पसंख्यक वोट के लिहाज से गांडेय सीट को सुरक्षित माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में गेंद चुनाव आयोग के पाले में होगी। इस साल नवंबर-दिसंबर में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में चुनाव आयोग उपचुनाव न कराने का फैसला ले सकता है। यदि चुनाव आयोग प्रतिकूल फैसला लेता है तो कल्पना फंस जाएंगी क्योंकि सीएम बनने के बाद उनको छह महीने के भीतर विधानसभा के लिए निर्वाचित होना होगा।

भाजपा का दावा EC नहीं करा सकता चुनाव
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि ऐसे में जब नियमित चुनाव होने में लगभग एक साल या उससे अधिक समय है तो सूबे किसी भी खाली सीट पर चुनाव कराना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। महाधिवक्ता के मुताबिक, मौजूदा सरकार की विधानसभा का गठन 5 जनवरी, 2020 को माना जाना चाहिए, इसलिए चुनाव कराया जा सकता है। ऐसे में कल्पना सोरेन चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि भाजपा का कहना है कि विधायकों का कार्यकाल सरकार बनने के साथ ही शुरू हो गया था, यानी 29 दिसंबर से... ऐसे में चुनाव आयोग उपचुनाव नहीं करा सकता है क्योंकि अगले चुनाव इस साल दिसंबर में होने हैं।

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