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सांसदों-विधायकों की रिहाई के कितने केस को दी गई चुनौती; झारखंड हाई कोर्ट का सरकार से सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानना चाहा कि निचली अदालत से जो आरोपी बरी हुए हैं, उनके खिलाफ अपील दायर हुई है या नहीं। लेकिन सरकार के अधिवक्ता इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।

सांसदों-विधायकों की रिहाई के कितने केस को दी गई चुनौती; झारखंड हाई कोर्ट का सरकार से सवाल
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीThu, 09 May 2024 06:51 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि झारखंड के सांसदों और विधायकों (माननीयों) के आपराधिक मामलों में बरी होने के बाद कितने केस को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की अदालत ने स्वत संज्ञान के तहत बुधवार को सुनवाई की। साथ ही अभियोजन निदेशक को शपथ पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी देने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानना चाहा कि निचली अदालत से जो आरोपी बरी हुए हैं, उनके खिलाफ अपील दायर हुई है या नहीं। लेकिन सरकार के अधिवक्ता इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। इस पर अदालत ने अभियोजन निदेशक को हाजिर होने का आदेश दिया। अभियोजन निदेशक अदालत में हाजिर हुए और उन्होंने भी कहा कि उन्हें इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।

बरी आरोपियों के खिलाफ दायर अपील की जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने समय देने का आग्रह किया। अदालत ने उन्हें समय देते हुए 17 मई से पहले यह बताने को कहा कि अब तक कितने आरोपी निचली अदालत से बरी हुए हैं। कितनों के खिलाफ सरकार ने अपील दायर की है।

सीबीआई से सवाल- गवाही में देरी क्यों
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सीबीआई अदालत में विधायकों-सांसदों के खिलाफ दर्ज 15 आपराधिक मामलों की सुनवाई चल रही है। गवाहियां कराई जा रही हैं। मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए सुनवाई जारी है। इस पर अदालत ने सीबीआई को जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा कि गवाही कराने में देरी क्यों हो रही है।

यह भी जानिए: तकनीक ने कोर्ट की कार्यवाही बदल दी- जस्टिस
झारखंड हाइकोर्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस चंद्रशेखर ने बुधवार को हाईकोर्ट में मोबाइल एप और ई-सेवाओं के लिए क्यूआर निर्देशिका जारी किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि तकनीक ने अदालती कार्यवाही को बदल दिया है। तकनीक के जरिए कई प्रक्रिया व्यवस्थित हो गई हैं। हाईकोर्ट ने इस वर्ष केवल 70 दिनों में 24769 मामलों का निपटारा किया है। हाईकोर्ट में वर्तमान में सिर्फ 19 जज हैं। हाईकोर्ट ने लंबित मामलों को कम करने के लिए कड़ी मेहनत की। इसके लिए पांच खंडपीठ और नौ एकल पीठ का गठन किया गया था। दीवानी मामलों में निपटारे की दर 176.59 प्रतिशत और आपराधिक मामलों में 123.34 प्रतिशत दर्ज की गई है।