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23 मई, 2020|5:06|IST

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बारिश और ओलावृष्टि से मधु से नहीं भरे मधुमक्खियों के छत्ते, किसान हैं परेशान

1 / 2बारिश और ओलावृष्टि से मधु से नहीं भरे मधुमक्खियों के छत्ते, किसान हैं परेशान

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मौसम की बेरुखी की वजह से रांची और खूंटी समेत आसपास के इलाके में इस बार मधु उत्पादक किसानों को निराशा हाथ लगेगी। गरमी के मौसम में करंज के फूल से मिलने वाले मधु से मधुमक्खियों के छत्ते इस बार नहीं भरेंगे। इससे किसान को आर्थिक नुकसान होगा वहीं मधुमक्खियों को आने वाले सीजन तक मधु के रूप में जरूरत भर आहार नहीं मिल सकेगा। गुणवत्ता में श्रेष्ठ माना जाने वाला करंज का मधु भी आमजन को सहूलियत से उपलब्ध नहीं हो सकेगा। लॉक डाउन की वजह से हनी बॉक्स का लीची, आम, तरबूज, खरबूज, लत्तर वाली सब्जियों समेत अन्य किस्म के फल-फूल और सब्जी उत्पादन वाले बिहार-झारखंड के कई इलाके में माइग्रेशन नहीं होने से पहले से ही मधु के उत्पादन पर असर पड़ा है। इस क्रम में उत्पादक जहां-तहां फंसे रहे।
गरमी नहीं बढ़ने से करंज के पेड़ में नहीं हुआ पुष्पन
मधु में श्रेष्ठ करंज के पेड़ में इस बार सीजन में ठीक से पुष्पन नहीं हुआ। करंज के पेड़ में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह से पुष्पन आरंभ हो जाता है।  गरमी नहीं पड़ने से फूल नहीं खिले। जिस पेड़ में फूल खिले भी वह तेज हवा के बहाव के साथ बारिश और ओलावृष्टि से झड़ गए। जिस कारण मधुमक्खियां परागन का काम पूरा नहीं कर सकीं। करंज फूल से मधुमक्खियां जून माह के पहले सप्ताह तक पर्याप्त मात्रा में मधु ले लेती हैं। अब सीजन समाप्त होने में 15 दिन बचे हैं। रांची के विभिन्न इलाकों में करंज के पेड़ में अब फूल नहीं के बराबर हैं।
छह हजार क्विंटल करंज मधु और नौ करोड़ का नुकसान
सीजन में किसानों को छह हजार क्विंटल मधु इस बार किसानों को नहीं मिल सकेगा। इससे किसानों को करीब नौ करोड़ रुपए का नुकसान होगा। रांची में एक हजार से अधिक मधुमकखी पालक हैं। इनके पास करीब 25 हजार हनी बॉक्स हैं। प्रत्येक में करीब 60 हजार इटालियन मधुमक्खी रहती हैं। शहद एकत्र करने में माहिर इटालियन मधुमक्खी तीन किमी के दायरे में सीजन में प्रतिदिन करीब पांच हजार फूलों तक पहुंचती हैं। एक बॉक्स से किसानों को साल भर में 50 किग्रा से अधिक मधु मिलता है।
बाहर से भी आते हैं मधुमक्खी पालक
करंज के सीजन में बिहार और पश्चिक बंगाल और ओड़िसा से काफी संख्या में मधुमक्खी पालक बॉक्स लेकर रांची समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में आते हैं। यहां आने से पूर्व सभी बिहार के लीची बागान और गंगा नदी के तट पर तरबूज-खरबूज के खेत में थे। लॉक डाउन और बारिश से वहां भी उन्हें पर्याप्त मात्रा में मधु नहीं मिला। दो माह तक वहीं फंसे रहने के बाद जब सभी रांची पहुंचे तो यहां भी करंज के फूल नहीं मिले।
अब तीन माह तक जेब से खर्च कर मधुमक्खियों को बचाना चुनौती
मधु उत्पादकों को अब आने वाले तीन माह तक जेब से खर्च कर मधुमक्खियों को बचाने की चुनौती है। तीन माह तक प्रति हनी बॉक्स डेढ़ से दो हजार रुपए का खर्च आएगा। पिछले तीन माह से बेहाल किसान और उत्पादकों के पास अब पैसे नहीं बचे हैं। इसका असर यह होगा कि खुराक नहीं मिलने पर मधुमक्खियां मरने लगेंगी।

अनुकूल मौसम नहीं होने से इस बार करंज के पेड़ से मधु नाम मात्र का मिल रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। करंज के फूल से मिले मधु से दवाई और डिब्बाबंद शहद तैयार करने वाली देश की बड़ी कंपनियों को भी जरूरत भर माल नहीं मिल सकेगा।
एमएस चौहान,
मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ,
दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, मोरहाबादी

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  • Web Title:Honeycomb not filled with honey due to rain and hail farmers are worried