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Hindustan Special:महिला किसान ग्रामीणों को बता रहीं मोटे अनाज के सेवन के फायदे

अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 में आठ मोटे अनाज को शामिल किया गया है। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, कुटकी, संवा, कंगनी, कोदो और चना है।

Hindustan Special:महिला किसान ग्रामीणों को बता रहीं मोटे अनाज के सेवन के फायदे
Swati Kumariहिन्दुस्तान,साहिबगंजWed, 21 Feb 2024 11:25 PM
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झारखंड के साहिबगंज जिले की महिला किसान अब खेतीबारी करने के अलावा ग्रामीणों को हेल्थ टिप्स भी दे रहीं हैं। महिला किसान लोगों को मोटा अनाज खाने से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी दे रहीं हैं। साहिबगंज जिले के 75 महिला किसानों को यहां के कृषि विज्ञान केंद्र में खासतौर पर प्रशिक्षित किया गया है। दो सप्ताह के प्रशिक्षण में मोटे अनाज की खेती के तरीके एवं इससे होने वाले फायदे को लेकर समाज के लोगों को जागरूक करने के भी टिप्स दिए गए हैं।

दरअसल, मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार अभियान चला रही है। जिले में इस साल खरीफ वर्ष 2023-24 में मोटे अनाज की 1390 हेक्टेयर में खेती करने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि लक्ष्य से कम खेती हुई। आने वाले समय में इससे अधिक हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती का लक्ष्य रखा गया है। साहिबगंज के प्रेमनगर की किसान खीरा देवी ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण के बाद उन्हें मोटे अनाज की खेती की अच्छी जानकारी मिली है। वे अब मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देंगी। समाज के लोगों को इसके सेवन से होने वाले फायदे बता रही हैं। इसी प्रकार बड़ा जिरवाबाड़ी की किसान शीला देवी मोटे अनाज की खेती कर कोई भी किसान स्वावलम्बी बन सकता है। इसकी खेती करना अपेक्षाकृत आसान और सस्ता होता है। इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण के बाद अब वे लोगों को इसे लेकर जागरूक कर रही हैं।

मोटे अनाज की खेती कर बनेंगी स्वावलंबी :
जिले में मोटे अनाज की बड़े पैमाने पर खेती होगी। इसके लिए जिला कृषि विभाग ने योजना तैयार की है। अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 में आठ मोटे अनाज को शामिल किया गया है। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, कुटकी, संवा, कंगनी, कोदो और चना है।  

आसान है इसकी खेती :
 कम वर्षा वाले क्षेत्र में भी मोटे अनाज की खेती संभव है। इसे जलोढ़ या लोमी मिट्टी में उगाया जा सकता है। किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए कम खर्च करने पड़ते हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. माया कुमारी ने बताया कि मोटे अनाज की खेती के लिए जिले के 90 किसानों को खासतौर पर प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 75 महिला किसान हैं। ये महिला किसान मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के अलावा अपने-अपने समाज में लोगों को इसके सेवन से सेहत को होने वाले फायदे के बारे में जागरूक करेंगी।

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