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Hindustan Special: पहली बार क्रिकेट के 'भगवान' को देखा तो देखता ही रहा, क्रिकेटर सौरभ तिवारी ने बताया अपना एक्सपीरियंस

सौरभ बताते हैं कि वैसे तो खेलों के लिए विख्यात लौहनगरी की छोटी टीम से टीम इंडिया तक के सफर में कई रोचक वाकये हुए, पर दो खिलाड़ियों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

Hindustan Special: पहली बार क्रिकेट के 'भगवान' को देखा तो देखता ही रहा, क्रिकेटर सौरभ तिवारी ने बताया अपना एक्सपीरियंस
Swati Kumariविद्यासागर,जमशेदपुरThu, 15 Feb 2024 06:32 PM
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जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम से अपने क्रिकेट कॅरियर की शुरुआत करने वाले झारखंड के सलामी बल्लेबाज सौरभ तिवारी ने संन्यास की घोषणा कर दी है। इसी स्टेडियम में 16 फरवरी से शुरू हो रहे राजस्थान के खिलाफ रणजी मैच के बाद वे इस खेल को अलविदा कह देंगे। टेल्को निवासी इस खिलाड़ी को अपने होमग्राउंड में मैच के बाद वह पारी की घोषणा का अवसर मिलेगा जो शायद हर किसी की तमन्ना होती है। झारखंड क्रिकेट टीम अपनी अहम पहचान रखने वाले इस खिलाड़ी ने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर और दुनिया के टॉप स्पिनर मुथैया के बारे में कई अहम बातों को साझा किया।

सौरभ बताते हैं कि वैसे तो खेलों के लिए विख्यात लौहनगरी की छोटी टीम से टीम इंडिया तक के सफर में कई रोचक वाकये हुए, पर दो खिलाड़ियों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और श्रीलंका के स्पिनर मुरलीधरन को वे कभी समझ नहीं पाये। बकौल सौरभ भारतीय टीम का जब हिस्सा बनने का मौका मिला और पहली बार क्रिकेट के 'भगवान' सचिन को देखा तो उन्हें देखता ही रह गया। बचपन से उन्हें टीवी स्क्रीन पर खेलते हुए देखता था। सोचा नहीं था कि इस रूप में उनसे मुलाकात होगी। ड्रेसिंग रूम में जब सचिन सामने आए तो कुछ पल के लिए हतप्रभ रह गया। तंद्रा टूटी तो समझ में आया कि ड्रेसिंग रूम में हैं। इस दौरान खिलाड़ियों का परिचय कराया जा रहा था। जब सचिन खिलाड़ियों को संबोधित कर रहे थे तो कुछ समझ में नहीं आया कि उन्होंने क्या कहा? कुछ बातों की कड़ी को खुद से जोड़ा तो कुछ साथी से समझने के लिए प्रयास किया।

सौरभ बताते हैं कि मुरलीरधन की गेंद को तमाम प्रयास के बावजूद समझ नहीं पाये। इसी तरह से इस स्पिनर फोबिया से कभी बाहर नहीं निकल पाया। यही कारण है कि जब-जब मुरलीधरन की गेंद का सामना किया तो आउट हो गया। मुरलीधरन की गेंद को समझ नहीं पाया। उनकी गेंद को समझने की कोशिश करता था कि आउट हो जाता थे। सौरभ तिवारी ने 11 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया और बहुत कम उम्र में ही रणजी करियर की शुरुआत इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने कर दी थी। विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने साल 2008 में अंडर-19 विश्वकप जीता था और सौरभ मलेशिया में विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे।

चढ़ना शुरू हुआ करियर ग्राफ:
सौरभ ने बताया कि इंडिया अंडर-19 से उनके करियर का ग्राफ ऊपर चढ़ा। उन्हें 2018 में मुंबई इंडियंस ने जोड़ा और उन्होंने 419 रन बनाए। इसी सीजन में एशिया कप के लिए टीम इंडिया से जून में बुलावा आया, लेकिन पहला मैच खेलने के लिए अक्तूबर तक इंतजार करना पड़ा। सौरभ ने कुल तीन वनडे खेले। उन्होंने 49 रन बनाए और दो बार नाबाद रहे।

काफी उतार-चढ़ाव रहा आईपीएल में:
आईपीएल में जहां उनका पहला सीजन शानदार रहा, लेकिन इसके बाद उन्हें बहुत मुश्किलें उठानी पड़ीं। मुंबई के लिए फाइनल खेलने के बाद 2011 में उन्हें आरसीबी ने टीम में लिया, लेकिन अगले तीन साल उन्हें पहले जैसी कामयाबी नहीं मिली। सौरभ के फॉर्म में गिरावट आती गई और समय इतना खराब हो गया कि वह 47 मैचों में एक ही अर्द्धशतक जड़ सके। कंधे की चोट के कारण वे साल 2014 संस्करण से बाहर हो गए। 2015 में उन्हें दिल्ली ने खरीदा और 2016 में वह पुणे सुपर जियांट्स से जुड़े।

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