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Hindustan Special: जाहेर थान की चहारदिवारी पर झलक रही है आदिवासी कला और संस्कृति

सामाजिक कार्यकर्ता शिवधन मरांडी कहते हैं कि वर्तमान सरकार में जाहेर थान घेराव हुआ है। इसमें आदिवासियों की कला को दर्शाया गया है। आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की यह बेहतर पहल है।

Hindustan Special: जाहेर थान की चहारदिवारी पर झलक रही है आदिवासी कला और संस्कृति
Swati Kumariहिन्दुस्तान,फतेहपुर (जामताड़ा)Tue, 13 Feb 2024 10:38 PM
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जामताड़ा के फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र में जाहेर थान की अलग पहचान बन रही है। पहचान इसलिए, क्योंकि यहां लीक से हटकर काम हो रहा है। जाहेर थान की दीवारों में आदिवासी संस्कृति को चित्र के जरिए बखूबी उकेरने की कोशिश हुई है। जाहेर थान आदिवासियों का पवित्र पूजा स्थल है, जहां आदिवासी समुदाय के लोग अपने इष्ट देवों की पूजा अर्चना करते हैं।

फतेहपुर के दर्जनों गांवों में स्थित जाहेर थान की घेराबंदी का काम चल रहा है। घेराबंदी के बाद दीवारों में आकर्षक आदिवासी पेंटिंग भी की जा रही है, जिसमें जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, कलाकृति और जीव-जंतुओं के महत्व को रेखांकित किया जा रहा है। आकर्षक पेंटिंग के कारण घेराबंदी काफी सुंदर और मनमोहक दिख रहा है। फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र के ही करजोरी, धावा, आसनबेड़िया आदि गांवों में घेराबंदी कार्य में खूबसूरत पेंटिंग देखकर गांव के अलावा आने-जाने वाले लोग भी रुककर निहारने को मजबूर हो जाते हैं। खूबसूरत पेंटिंग से जाहेरथान की अलग पहचान दिखाई दे रही है।

आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की पहल:
सामाजिक कार्यकर्ता शिवधन मरांडी कहते हैं कि वर्तमान सरकार में जाहेर थान घेराव हुआ है। इसमें आदिवासियों की कला को दर्शाया गया है। आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की यह बेहतर पहल है। पेंटिंग में पूर्वजों द्वारा की जाने वाली पारंपरिक पूजा, नाच गाने को दिखाया गया है। चित्र में पेड़ के नीचे एक व्यक्ति बांसुरी बजा जा रहा है और बांसुरी की आवाज सुनकर खेत में हल चला रहा किसान और बिचड़ा बो रही महिला मुग्ध हो जाती है। बीस सूत्री उपाध्यक्ष उकील सोरेन ने कहा कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में आदिवासी पूजा स्थलों जाहेर थान का सौंदर्यीकरण एक बेहतर पहल है।
 

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