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धनबाद जज मौत मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा-बिना पूछे क्यो दाखिल की चार्जशीट

रांची। प्रमुख संवाददाताYogesh Yadav
Fri, 22 Oct 2021 10:59 PM
धनबाद जज मौत मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा-बिना पूछे क्यो दाखिल की चार्जशीट

धनबाद के जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल करने के तरीके पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई और उसे त्रुटिपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल करने में हाईकोर्ट को अंधेरे में रखा। आरोप पत्र दाखिल करने के पहले जांच एजेंसी ने अनुमति भी नहीं ली। दुखद तो यह है कि सीबीआई ने जो प्रगति रिपोर्ट पेश की है उसमें आरोप पत्र को संलग्न भी नहीं किया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और सीबीआई जैसी जांच एजेंसी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती।

अदालत ने कहा कि कोर्ट ने पूर्व में ही आशंका जाहिर की थी कि यह मामला कहीं मिस्ट्री मर्डर न बन जाए। लेकिन अब लग रहा है कि यह मामला मिस्ट्री ऑन एक्सप्लेन की ओर बढ़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की अब तक की जांच से कोर्ट बहुत दुखी है। 

आरोप पत्र में एक भी साक्ष्य नहीं

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने कहा कि आरोप पत्र में ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके सहयोगी राहुल पर हत्या और साजिश में शामिल होने का आरोप तो लगा दिया गया है, लेकिन इसका एक भी साक्ष्य नहीं दिया गया। सीबीआईयह नहीं बता रही है कि आखिर हत्या का कारण और उद्देश्य क्या था। जज की हत्या की साजिश क्यों की गयी थी। साजिश करने वालों में कौन कौन हैं।  जब चार्जशीट में हत्या के मोटिव के बारे में नहीं बताया गया है तो जांच पूरी करते हुए चार्जशीट कैसे दाखिल कर दी गई।  इस तरह की चार्ज शीट की उम्मीद सीबीआई से नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि सीबीआई के आरोप पत्र से प्रतीत होता है कि आरोपियों को निचली अदालत में एक्सीडेंट साबित करने का मौका दे रही है।

आरोप पत्र ने पूरे केस को समाप्त कर दिया

अदालत इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है।  इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कराया था और न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिरा है।   कोर्ट इनका मनोबल बढ़ाने के लिए इस मामले में शामिल सभी आरोपियों  को सख्त सजा दिलाने के बारे में सोच रही थी। लेकिन सीबीआई की अब तक जांच से पता चल रहा है कि उन्होंने पूरे केस को समाप्त कर दिया है।

मॉनिटरिंग का मतलब खानापूर्ति नहीं 

रांची। धनबाद के जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल करने के तरीके पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है। मॉनिटरिंग का मतलब खानापूर्ति नहीं होता। कोर्ट इस मामले के हर पहलू की मॉनिटरिंग करेगा। लेकिन सीबीआई इसे हल्के में ले रही है। हर कुछ छिपा रही है। चार्ज शीट दाखिल करने के पूर्व कोर्ट को जानकारी नहीं देना और चार्ज शीट दाखिल करने के बाद भी उसकी कॉपी मॉनिटरिंग बेंच को नहीं देना काफी दुखद है। 

सीबीआई मुख्यालय की अनुमति के बाद दाखिल हुई चार्जशीट

सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि चार्ज शीट दाखिल करने के पूर्व सीबीआई के मुख्यालय से अनुमति ली गयी थी। मुख्यालय की अनुमति के बाद ही चार्ज शीट दायर की गयी है। साजिश और मोटिव के मामले पर जांच अभी जारी है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जतायी और कहा कि सीबीआई में भी पुलिस से ही लोग जाते हैं। सीबीआई से ऐसी जांच और चार्ज शीट की उम्मीद नहीं की जा सकती। 

निदेशक को तलब करेगी अदालत

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में अगले सप्ताह कोर्ट सीबीआई निदेशक को तलब करेगी। निदेशक से ही पूछा जाएगा कि जब कोई साक्ष्य मिला ही नहीं है तो कैसे आरोप पत्र में हत्या और साजिश का उल्लेख किया गया है। सीबीआई ने आईपीसी की धारा 302, 201 और 34 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है, लेकिन इसमें एक भी साक्ष्य नहीं है। मोटिव का उल्लेख नहीं है, तो क्या इससे आरोपियों को राहत नहीं मिल जाएगी। हत्या का मामला गैर इरादतन हत्या में बदल जाएगा। इस पर सीबीआई ने अगले सप्ताह विस्तृत रिपोर्ट देने की बात कही। तह अदालत ने कहा कि अगले सप्ताह की रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट इस पर निर्णय लेगी।  

अनुसंधान अधिकारी से पूछा कितने मामले की जांच की

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले के जांच अधिकारी से पूछा कि इस तरह के कितने मामले की उन्होंने जांच की है। और कितने सफल रहे है। इस पर जांच अधिकारी ने कहा कि करीब पांच मामलों की जांच की है और सभी में दोषियों को सजा हुई है। 

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