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Hindi News झारखंडजेल में रहकर फेसटाइम से सरकार चला रहे हेमंत सोरेन, BJP का बड़ा दावा

जेल में रहकर फेसटाइम से सरकार चला रहे हेमंत सोरेन, BJP का बड़ा दावा

बीजेपी नेता ने दावा किया है कि हेमंत सोरेन जेल से सरकार चला रहे हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस ने आग्रह किया है कि वह हेमंत सोरेन को जांच के लिए मुंबई ले जाएं कारी फोन से शासन बंद हो जाएं।

जेल में रहकर फेसटाइम से सरकार चला रहे हेमंत सोरेन, BJP का बड़ा दावा
former jharkhand chief minister hemant soren
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,रांचीFri, 24 May 2024 01:02 PM
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बीजेपी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जेल से सरकार चलाने का आरोप लगाया हैय़ बीजेपी नेता और सासंद निशिकांत दुबे का दावा है कि हेमंत सोरेन फेसटाइम के जरिए जेल से सरकार चला रहे हैं। हेमंत सोरेन जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 3 महीने से ज्यादा समय से  न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। गिरफ्तार होने से ठीक पहले उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाज चंपई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। 

इस बीच निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि हेमंत सोरेन जेल से सरकार चला रहे हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस ने आग्रह किया है कि वह हेमंत सोरेन को जांच के लिए मुंबई ले जाएं कारी फोन से शासन बंद हो जाएं। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जेल से फेसटाइम के माध्यम से सरकार चला रहे हैं। ईडी की कस्टडी में हैं,अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी बेल मना कर दिया है। मुबंई पुलिस से आग्रह है कि बलात्कार की जो जॉंच आप पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के खिलाफ बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत पर कर रहे हैं,इन्हें पूछताछ के लिए मुम्बई ले जाइए ।फोनो शासन बंद हो जाएगा।

सुप्रीन कोर्ट ने जताई थी नाराजगी

इससे पहले हेमंत सोरेन की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया कि उन्होंने एक साथ दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। एक में उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, जबकि दूसरी में जमानत की गुहार वाली। निचली अदालत ने इसका संज्ञान भी लिया था।

पीठ ने सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री सोरेन का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से पूछा,“हमें बताएं कि इसका उल्लेख (याचिका में) कहीं भी क्यों नहीं किया गया कि अदालत द्वारा संज्ञान लिया गया था।” पीठ ने कहा,“हम उस व्यक्ति की याचिका पर विचार नहीं कर सकते, जिसका आचरण (तथ्यों का खुलासा नहीं करने के मामले में) दोषपूर्ण है।”

इसके बाद सिब्बल ने अदालत के समक्ष याचिका वापस लेने अनुमति की गुहार लगाई, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस तरह सोरेन ने अपनी याचिका वापस ले ली। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य का हवाला दिया कि शिकायत पर चार अप्रैल 2024 को संज्ञान लिया गया था और तत्काल याचिका में इसका उल्लेख नहीं किया गया था।  सिब्बल ने तर्क दिया कि गलती संबंधित अधिवक्ता की थी। इसमें मुवक्किल (सोरेन) की कोई ग़लती नहीं है। वह तो जेल बंद है। इसके बाद पीठ ने कहा,“आपका आचरण दोषमुक्त नहीं है। यह निंदनीय है।”

एजेंसी से इनपुट