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हाई कोर्ट की शिकायत लेकर सबसे बड़ी अदालत पहुंचे हेमंत सोरेन, इस मामले में देरी करने का आरोप

वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए चल रहे लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सोरेन के केस की तुरंत सुनवाई करने का अनुरोध किया है।

हाई कोर्ट की शिकायत लेकर सबसे बड़ी अदालत पहुंचे हेमंत सोरेन, इस मामले में देरी करने का आरोप
Devesh Mishraहिन्दुस्तान टाइम्स,रांचीWed, 24 Apr 2024 01:12 PM
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जेल में बंद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बुधवार को उन्होंने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया है, जिसमें पूर्व सीएम ने झारखंड हाई कोर्ट पर आरोप लगाया है कि उनकी याचिका पर फैसला सुनाने में देरी की जा रही है। दरअसल, सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी को चुनौती दी है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए चल रहे लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सोरेन के केस की तुरंत सुनवाई करने का अनुरोध किया है।

हाई कोर्ट पर क्या आरोप?
पूर्व सीएम के वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि 'हमने अनुच्छेद 32 के तहत इस अदालत का रुख किया था, लेकिन हमें पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा गया था। हम वहां गए। मामले की सुनवाई 27 और 28 फरवरी को हुई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया। लेकिन अभी तक फैसला नहीं सुनाया गया है। हम जज के पास वापस गए, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।' 

तत्काल सुनवाई की मांग
कपिल सिब्बल से यह पूछे जाने पर कि क्या उनके मुवक्किल (हेमंत सोरेन) ने नई याचिका दायर की है, उन्होंने बताया, 'हां, हमने एक नई याचिका दायर की है और हम चाहते हैं कि इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई हो... अगर हम कुछ और कहेंगे तो यह कहा जाएगा कि हम न्यायपालिका पर हमला कर रहे हैं।' 

क्या बोले जस्टिस खन्ना?
जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि 'वह (कपिल सिब्बल) सुनवाई की तारीख तय नहीं कर सकते क्योंकि ऐसा करना भारत के मुख्य न्यायाधीश का काम है। इसके लिए एक प्रक्रिया है।' इसपर सिब्बल ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाने के लिए हाई कोर्ट को चार सप्ताह का समय और दे देता है तो याचिका का मुख्य उद्देश्य विफल हो जाएगा।' उन्होंने इसे 'बहुत दुखद' बताया।

गिरफ्तारी के दिन खटखटाया था SC का दरवाजा
गौरतलब है कि गिरफ्तारी से पहले 31 जनवरी को हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी थी और ईडी की कार्रवाई को अवैध व राजनीति से प्रेरित बताया था। हालांकि गिरफ्तारी के बाद सोरेन ने याचिका में नया आवेदन दायर किया। उन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत से इस गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग की। 

हेमंत सोरेन की याचिका पर 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय में मामला दायर करने का निर्देश दिया। बता दें कि इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 28 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं 15 अप्रैल को हेमंत सोरेन ने जमानत के लिए हाई कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की। जिस पर 16 अप्रैल को सुनवाई हुई और ईडी को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया। इस मामले में दोबारा 23 अप्रैल को सुनवाई हुई। ईडी ने कोर्ट से फिर समय की मांग की, जिसके लिए अदालत ने परमिशन दे दिया। अब जमानत वाली याचिका पर 1 मई को सुनवाई होनी है। 

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