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2 जुलाई, 2020|1:08|IST

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दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी झारखंडियों की घर वापसी करा रही हेमंत सरकार

केंद्र सरकार से मिली छूट के बाद त्वरित कार्यवाही करते हुए हेमंत सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी झारखंडियों को वापस लाने के उपाय शुरू का दिए हैं। इसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल से की गई है। वहां से झारखंड के लोगों को लाने के लिए गुरुवार रात साहिबगंज से बसें रवाना कर दी गई हैं। बाकि राज्यों से लोगों को लाने के लिए शुक्रवार से बसें भेजने की संभावना है। 

सरकार ने सबसे पहले बसें साहिबगंज से पश्चिम बंगाल भेजी है। इन बसों से साहिबगंज में सरकार के कॉरन्टाइन को पूरा कर लेने वाले फंसे पश्चिम बंगाल के श्रमिकों को भेजा गया है। अब इसी बस से पश्चिम बंगाल में फंसे झारखंड के मजदूरों को वापस लाया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के हरेक फंसे लोगों को वापस लाया जाएगा। 
 जरूरत पड़ी तो सरकार हवाई जहाज की सेवा भी लेगी। उन्होंने फंसे हुए छात्रों को अपने संसाधन पर वापस लाने को इच्छुक अभिभवकों को अपने जिला उपायुक्तों से अविलंब पास प्राप्त करने की अपील की है। इस संबंध में सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिया गया है। 

सरकार फंसे हुए हर झारखंडी को वापस लाने की कवायद में जुट गई है। अब तक दूसरे राज्यों में फंसे तीन लाख लोगों का डाटा तैयार हो गया है। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। बहुत जल्द पड़ोसी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तसीगढ़, उत्तर प्रदेश में फंसे प्रवासी श्रमिकों और छात्रों को बस से लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उम्मीद है कि केंद्र सरकार दूर के राज्यों के बीच फंसे लोगों के आवागमन के लिए विशेष ट्रेन चलाएगी। नोडल अफसरों की पूरी टीम केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लगातार संपर्क में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोटा, इंदौर, पुणे, हैदराबाद या दक्षिण भारत में फंसे छात्रों के अभिभावक अपने संबंधित जिले के उपायुक्त से इंटर-स्टेट परिवहन के लिए जल्द पास प्राप्त करके अपने संसाधन से छात्रों को लाने जा सकते हैं। 

सरकार ने सभी उपायुक्तों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। आवागमन के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल को फॉलो करना होगा। संबंधित राज्य और वापसी पर प्रशासन से संपर्क कर स्वास्थ्य जांच के आधार पर सरकारी या होम कॉरन्टाइन में रहना होगा। 

तीन लाख लोगों का डाटा तैयार : झारखंड कोरोना सहायता ऐप की मदद से अब तक दूसरे राज्यों में फंसे तीन लाख लोगों का डाटा तैयार हो गया है। सरकार कॉल सेंटर और ऐप के माध्यम से सरकार से संपर्क करने वाले लोगों में से उन लोगों की अलग सूची बनाई जा रही है जो झारखंड वापस आना चाहते हैं। ऐसे लोगों की संख्या कितनी है इसकी जानकारी जल्द हो सकेगी। 

राज्य में फंसे लोगों का आवागमन भी जल्द : सरकार ने सभी उपायुक्तों को राज्य के विभिन्न जिलों में लॉक डाउन के कारण फंसे लोगों के आवागमन के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। ऐसे लोगों को मेडिकल ट्रैक के प्रोटोकॉल के आधार पर आवागमन की अनुमति दी जाएगी। सरकार इसकी व्यवस्था भी की रही है। 

जरूरत पड़ी तो हवाई जहाज से भी लाएंगे : मुख्यमंत्री ने गुरुवार देर शाम मीडिया को बताया कि राज्य के नोडल अफसरों ने विभिन्न राज्यों के नोडल अफसरों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। बहुत जल्द छात्रों, श्रमिकों, इलाज के लिए दूसरे राज्यों में गए लोगों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो बाहर फंसे राज्य के लोगों को हवाई जहाज से भी लाया जायगा। वहीं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने बताया कि पहले पड़ोसी राज्यों में फंसे लोगों को बस से लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच मजदूरों, छात्रों को लाने की पहल की गई है। पहल होने के बाद इससे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।  बस से झारखंड में फंसे मजदूरों को पश्चिम बंगाल ले जाया जाएगा। उसके बाद उसी बस से पश्चिम बंगाल में फंसे झारखंड के लोगों को वापस लाया जाएगा।  

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  • Web Title:Hemant government making homecoming of migrant Jharkhandis stranded in other states