DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अतीत के पन्नों से: पंडित नेहरू ने पहला चुनाव लड़ाया, इंदिरा ने मंत्री बनाया

झारखंड के लोहरदगा लोकसभा संसदीय क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व करनेवाले कार्तिक उरांव को पंडित जवाहरलाल नेहरू राजनीति में लेकर आए। लोकसभा चुनाव लड़ाया। लेकिन वह मंत्री बने इंदिरा गांधी की कैबिनेट में। 1962 का पहला चुनाव वह हार गए थे। 1967 में चुनकर लोकसभा पहुंचे। तब तक पंडित जवाहर लाल नेहरू गुजर चुके थे। 1971 और 1980 में फिर सांसद बने। 1980 में इंदिरा जी की कैबिनेट में उड्डयन एवं संचार मंत्री बने। कार्तिक उरांव एक साधारण राजनीतिज्ञ या सांसद मात्र नहीं थे। वह एक कुशल और ख्यातिप्राप्त इंजीनियर थे। ब्रिटेन में 1959 में निर्मित हिंकले न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना का श्रेय झारखंड के इस गुणी इंजीनियर को जाता है। यह उस समय दुनिया का सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर  स्टेशन था।

नौ साल तक विदेश में रहने के बाद 1961 में स्वदेश लौटने तक कार्तिक उरांव के नाम की चर्चा दिल्ली की सत्ता के गलियारों में होने लगी थी। भारत लौटने पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने कार्तिक उरांव की प्रतिभा को सराहा और एचईसी के सुपरिटेंडेंट कंस्ट्रक्शन डिजायनर के पद पर नियुक्ति की अनुशंसा की। कुछ दिनों के बाद डिप्टी चीफ इंजीनियर डिजायनर के पद पर उनकी प्रोन्नति हुई। लेकिन एक साल के बाद ही 1962 में कार्तिक उरांव ने राजनीति में प्रवेश किया। पंडित नेहरू के मार्ग दर्शन में वह 1962 का लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन पहला चुनाव  जीत नहीं पाए। 1967 का चुनाव जीतकर लोकसभा में प्रवेश किया।

झारखंड के गुमला के सुदूर गांव लिटाटोली में एक आदिवासी परिवार में जौरा उरांव और बिरसो उरांव के घर जन्मे कार्तिक उरांव ने अपनी आरंभिक पढ़ाई गुमला में की थी। फिर 1944 में साइंस कॉलेज पटना से आईएससी करने के बाद बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1950 में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री ली। आगे की पढ़ाई के लिए वह विदेश चले गए। नौ साल तक वह विदेश में ही रहे। 

1968 में चल रहा भूदान आंदोलन तेज था। आदिवासियों की जमीन औने-पौने के भाव में ली जा रही थी। ऐसे समय उन्होंने इंदिरा गांधी से आदिवासियों की जमीन लुटने और भूमिहीन होने से बचाने की बात की। उनका प्रयास सफल रहा। इंदिरा गांधी ने भूमि वापसी कानून बनाकर आदिवासियों की जमीन वापस कराने की व्यवस्था की। रांची में स्थापित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय कार्तिक उरांव को ही जाता है। जनजातीय इलाकों में विकास के लिए पृथक योजना ट्राईबल सब प्लान उन्होंने ही बनवायी थी। आदिवासी समाज उन्हें मसीहा मानता था। आठ दिसंबर 1981 को वह संसद भवन के गलियारे में गिर गए। उसी हालत में उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उनकी मौत हृदय गति रुकने से हो गई।

पहले पत्नी और अब बेटी संभाल रही राजनीतिक विरासत
कार्तिक उरांव की राजनीतिक विरासत उनकी पत्नी सुमति उरांव ने संभाल ली। उन्होंने राजनीति में आने का संकल्प लिया। 1984 और 1989 में वह लोहरदगा से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुईं। केंद्र में मंत्री बनीं। उनके निधन के बाद अब उनकी पुत्री उनकी राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं।  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:From the pages of the past: Pandit Nehru fought the first election Indira made the minister