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पहली बार: सरकारी स्कूलों के बच्चे प्राइवेट वालों से अच्छे, तुलना में अभिभावकों ने 10% ही खर्चे

एक तरफ जहां निजी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई का खर्च आसमान छूने के बाद भी अभिभावक बच्चों को वहां पढ़ाना पसंद करते हैं। दूसरी तरफ नि:शुल्क शिक्षा होने के बाद भी सरकारी स्कूल की कक्षाएं  खाली रह रही हैं। अभिभावकों की अक्सर शिकायत रहती है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है। गुरुवार को जैक की ओर से जारी मैट्रिक के रिजल्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को एक नया आयाम दिया है। पहली बार राज्य बोर्ड ने केंद्रीय बोर्ड को नंबर के मामले में पछाड़ा है। सीबीएसई के राज्य टॉपर को जहां इस बार 98.8 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं तो जैक बोर्ड की टॉपर प्रिया राज को 99.2 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं। प्रथम श्रेणी से प्राप्त करने वाले छात्रों का आंकड़ा इस बार 50 फीसदी को पार कर गया है। इसमें 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे 90 फीसदी से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं।

10 फीसदी से भी कम है खर्च 
सरकारी स्कूल के बच्चों के पढ़ाई का खर्च निजी विद्यालय के बच्चों के खर्च से 10 फीसदी से भी कम है।  एसएस डोरंडा प्लस टू बालिका उच्च विद्यालय की प्राचार्या सरिता चंद्रा ने बताया कि सरकारी स्कूल लड़कियों के सारे खर्च  सरकार वहन करती है। लड़कों को एडमिशन के दौरान 135 रुपए, किताब के लिए 800 रुपए, ड्रेस के लिए 1000 रुपए और फॉर्म भरने के दौरान 500 रुपए खर्च करना पड़ता है। वह बताती हैं कि सरकारी स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को अधिकतम पांच हजार रुपए खर्च करना होता है।

डेढ़ लाख रुपए का आता है खर्च
शहर के एक निजी स्कूल में अपने बच्चे की पढ़ाई करा रही एक मां ने बताया कि नामांकन से लेकर फॉर्म भराने तक की प्रक्रिया में उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया। इसमें 40 हजार रुपए का नामांकन फीस, तीन हजार रुपए महीने ट्यूशन फीस, कोचिंग का तीन हजार रुपए ,  तीन हजार रुपए का ड्रेस, किताब-कॉपी में सात हजार रुपए और लगभग 1500 रुपए बस किराया देना होता है। फीस का यह ग्राफ शहर के एक सामान्य निजी विद्यालय का है। 

सरकारी स्कूल का खर्च
लड़कियों का खर्च- 0
लडकों का खर्च
नामांकन शुल्क- 135 रुपए
किताब- 800
यूनिफॉर्म- 1000
फॉर्म भरने का शुल्क- 500

निजी स्कूलों का खर्च
नामांकन फीस - 40,000
मासिक फीस - 3000
कोचिंग- 3000
किताब- 7000
बस फीस - 1500
यूनिफार्म-3000

 

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  • Web Title:For the first time: Children of government schools are good with private ones compared to parents at 10