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बिहारकोरोना से जंग: म्यूजिक थेरेपी से बढ़ा ICU में भर्ती मरीजों का रिकवरी रेट

विपिन नागवंशी, भागलपुर Published By: Ajay Singh
Sat, 15 May 2021 09:55 AM
कोरोना से जंग: म्यूजिक थेरेपी से बढ़ा ICU में भर्ती मरीजों का रिकवरी रेट

भागलपुर मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कोरोना मरीजों को म्यूजिक थेरेपी से फायदा पहुंच रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि मायागंज अस्पताल की आईसीयू में कोरोना मरीजों का रिकवरी का रेट 74 प्रतिशत है, जबकि सामान्य वार्ड में 69 प्रतिशत। अस्पताल के चिकित्सक कहते हैं कि आईसीयू में मेडिकल इक्विपमेंट और सुविधाएं ज्यादा होती हैं, मगर मरीज भी तो बहुत गंभीर होने के बाद ही आईसीयू में लाए जाते हैं इसलिए म्यूजिक थेरेपी के असर को दरकिनार नहीं किया जा सकता। इसी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. पंकज कुमार ‘मनस्वी’ न कहा, आंकड़ों के विश्लेषण के बाद हम लोग इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि म्यूजिक थेरेपी काम आ रही है। 

बोले, मरीज कोरोना का बहादुरी से सामना करें। मूड को हल्का रखें और इलाज के दौरान खुद को व्यस्त व मस्त रखें। योग और प्राणायाम आपके मन के खौफ को दूरकर डिप्रेशन कम करने में सहयोग करेगा। सकारात्मक सोच व खुशमिजाज मूड न केवल जल्दी कोरोना से मुक्त करेगा, बल्कि मौत होने के खतरे को बहुत हद तक कम कर देगा। आंकड़ों को देखने के बाद अस्पताल अधीक्षक ने जल्द ही दूसरे वार्डों में भी संगीत की व्यवस्था करने का फैसला किया है।

आईसीयू में मरीजों की रिकवरी रेट ज्यादा
एक से 13 मई के बीच भक्ति-संगीत की व्यवस्था वाली आईसीयू में 123 मरीज भर्ती हुए। इनमें से करीब 25 प्रतिशत यानी 31 मरीजों की मौत हुई और 92 ठीक हो गये। वहीं अन्य कोरोना वार्ड में इस दौरान 153 कोरोना मरीज भर्ती हुए। इनमें से 48 की मौत हुई तो 105 मरीज ठीक हो गये। इस तरह सामान्य वार्ड में कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट जहां 68.62 प्रतिशत रहा तो वहीं संगीत वाली आईसीयू में 73.98 प्रतिशत। डॉ. पंकज कहते हैं कि जिस आईसीयू में 90 प्रतिशत कोरोना संक्रमित गंभीर अवस्था में आते हैं, वहां पर संगीत की व्यवस्था होने से मरीजों में तनाव व डिप्रेशन का स्तर कम पाया गया। इससे अस्पताल में होनेवाली कुल मौतों में से आईसीयू में महज 39.24 प्रतिशत ही हुईं। वहीं अन्य कोरोना वार्ड जहां पर मरीजों के लिए संगीत की व्यवस्था नहीं थी और मरीजों में तनाव व अवसाद का स्तर आईसीयू के मरीजों की तुलना में अधिक पाया गया, वहां पर कुल मौतों में से 60.76 प्रतिशत हुईं।

नौ माह पहले शुरू हुई थी संगीत सुनाने की परंपरा
नौ महीने पहले सेहत विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के दौरे पर आये थे। उस समय उन्होंने 136 बेड के एमसीएच कोरोना आइसोलेशन वार्ड व आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों को सुबह-शाम संगीत सुनाने की व्यवस्था करने का आदेश तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल को दिया था। उस समय दोनों वार्डों में संगीत की व्यवस्था तो हुई, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में संगीत की व्यवस्था नहीं की गयी। जबकि आईसीयू में रोजाना सुबह-शाम यहां भर्ती मरीजों को संगीत सुनाया जा रहा है।

डरे-डरे से रहते हैं सामान्य वार्ड के मरीज
मनोचिकित्सक ने अपने राउंड में आईसीयू के मरीजों में सामान्य वार्डों की तुलना में कोरोना का खौफ कम देखा। सामान्य वार्डों में भर्ती मरीज जहां कोरोना कहीं उनकी जान न ले लें, ऑक्सीजन लेवल कम तो नहीं है जैसे डर से परेशान दिखे। उनमें तनाव व डिप्रेशन का स्तर अधिक पाया गया। वहीं आईसीयू में भर्ती मरीजों में कोरोना से निपटने का जज्बा-इच्छा और खुद की सेहत को लेकर फिक्रमंद दिखे। इससे उनमें तनाव व डिप्रेशन का स्तर कम मिला। सुबह-शाम का माहौल संगीत के कारण इतना हल्का रहता है कि मरीज तो मरीज यहां पर तैनात डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का मन प्रसन्न रहता है।

आईसीयू की तरह हरेक कोरोना वार्ड में लाउडस्पीकर लगाया जायेगा। इन लाउडस्पीकर के जरिये हरेक मरीजों को सुबह-शाम संगीत सुनाने की व्यवस्था की जायेगी।
डॉ. असीम कुमार दास, अधीक्षक, जेएलएनएमसीएच

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