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Hindi News झारखंड'पिता स्वर्ग से भी ऊंचा है', महाभारत का जिक्र कर झारखंड HC ने माता-पिता के प्रति बेटे के कर्तव्य बताए

'पिता स्वर्ग से भी ऊंचा है', महाभारत का जिक्र कर झारखंड HC ने माता-पिता के प्रति बेटे के कर्तव्य बताए

देवकी साव ने कोडरमा में एक फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर अपने छोटे बेटे मनोज से गुजारा-भत्ता दिलाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने मनोज को निर्देश दिया था कि अपने पिता को वह 3000 रुपये दे।

'पिता स्वर्ग से भी ऊंचा है', महाभारत का जिक्र कर झारखंड HC ने माता-पिता के प्रति बेटे के कर्तव्य बताए
Praveen Sharmaरांची। पीटीआईFri, 26 Jan 2024 02:55 PM
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झारखंड हाईकोर्ट ने एक पिता और पुत्र के बीच विवाद के मामले में फैसला सुनाते हुए अपने माता-पिता के प्रति बेटे की कर्तव्यों को उजागर करने के लिए महाभारत और धर्मग्रंथों का हवाला दिया। जस्टिस सुभाष चंद ने महाभारत में वर्णित यक्ष के प्रश्नों पर युधिष्ठिर के उत्तरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाभारत में पांडवों में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर ने कहा था कि 'पिता का स्थान स्वर्ग से ऊंचा है'।

60 वर्षीय व्यक्ति देवकी साव ने अपने छोटे बेटे मनोज साव से भरण-पोषण की मांग करते हुए कोडरमा के फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने मनोज को अपने बुजुर्ग पिता को प्रति माह 3000 रुपये देने का निर्देश दिया था।

वहीं मनोज ने यह दावा करते हुए कि उसके पिता पैसे वाले हैं और उनके पास आय के कई स्रोत हैं, मनोज ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता देवकी साव जो अपने बड़े बेटे के साथ रहते हैं। उन्होंने अपनी कृषि भूमि को अपने दोनों बेटों के बीच समान रूप से बांट दिया था। जस्टिस सुभाष चंद ने कहा कि एक बेटे का कर्तव्य होता है कि अपने माता-पिता की देखभाल करे।

अदालत के आदेश में कहा गया, "महाभारत में, यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा: 'पृथ्वी से अधिक वजनदार क्या है? स्वर्ग से भी ऊंचा क्या है?' युधिष्ठिर ने उत्तर दिया: 'मां पृथ्वी से भी अधिक भारी है; पिता स्वर्ग से भी ऊंचा है।'

भले ही तर्क-वितर्क के लिए पिता कुछ कमाता हो, जस्टिस चंद ने आदेश में कहा कि अपने वृद्ध पिता का भरण-पोषण करना एक बेटे का पवित्र कर्तव्य है। उन्होंने एक धर्मग्रंथ का हवाला देते हुए यह भी कहा, 'पिता तुम्हारा भगवान है और मां तुम्हारी प्रकृति है। वे बीज हैं, तुम पौधा हो।'

इस मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने मनोज साव द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उसे अपने पिता को 3,000 रुपये प्रति माह देने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले के एक आदेश में भी जिसमें एक परेशान पत्नी अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर रही थी, जस्टिस सुभाष चंद ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस चंद ने कहा कि एक पत्नी से शादी के बाद अपने पति के परिवार के साथ रहने की उम्मीद की जाती है, जब तक कि अलग होने का कोई ठोस और उचित कारण न हो। उन्होंने क्रम में ऋग्वेद, यजुर्वेद और मनुस्मृति के अंशों का भी उपयोग किया।  

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