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हिंदी न्यूज़ झारखंडइन से सीखें: फूल की खुशबू से महक रहा झारखंड का उग्रवाद प्रभावित ऊपरघाट

इन से सीखें: फूल की खुशबू से महक रहा झारखंड का उग्रवाद प्रभावित ऊपरघाट

रामचंद्र अंजाना,बोकारोSudhir Kumar
Sat, 04 Dec 2021 09:33 AM
इन से सीखें: फूल की खुशबू से महक रहा झारखंड का उग्रवाद प्रभावित ऊपरघाट

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झारखंड के बोकारो का नावाडीह प्रखंड का ऊपरघाट तो वैसे उग्रवाद क्षेत्र के लिए ही ज्यादा जाना जाता है। लेकिन यहां के काच्छो पंचायत के गोवारडीह निवासी लालमणि महतो ने गेंदा फूल की खेती कर  न सिर्फ अपनी व अपने परिवार की जिंदगी तो गुलजार की, बल्कि इलाके को एक अलग पहचान दिलाने की कोशिश भी की है। अपनी ढाई एकड़ बंजर भूमि में गेंदा के साथ-साथ थोड़ी-बहुत गुलाब फूल की भी खेती कर दूसरों के लिए मिशाल बन गए हैं। किसान लालमणिमहतो, पत्नी देवंती देवी व पुत्रवधू सावित्री देवी सभी इसमें लगे हुए हैं। लालमणि महतो ने बताया कि वे पूरे नावाडीह प्रखंड में अकेले गेंदा फूल की खेती कर रहे हैं। वहीं अब धीरे-धीरे आसपास के गांव के किसान भी गेंदा फूल की खेती का तरीका सीख रहे हैं।

लालमणि महतो बताते हैं कि शादी एवं धार्मिक अनुष्ठानों में गेंदा फूल की मांग रहने पर किसान लालमणि के यहां सस्ते दर पर फूल लेने के लिए इनके घर बोकारो सहित रामगढ़ व हजारीबाग से भी फूल बिक्री कारोबार से जुड़े लोग आते-जाते रहते हैं। किसान लालमणि का पुत्र गौतम महतो बेरमो के गोमिया, कथारा, फुसरो व कुरपनिया से लेकर बोकारो तक के बाजारों के मालाकारों के यहां फूल पहुंचाते हैं।

पुणे में अपने दोस्त से गेंदा फूल की खेती सीखी

पुणे में किसान दोस्त चींकू से गेंदा फूल की खेती का प्रशिक्षण लेकर किसान लालमणि ने भी अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल ली है। उन्होने बताया कि एक खेती पांच माह तक रहती है। इसके बाद दूसरी खेती का बीजारोपण होता है। गेंदा फूल की बीज कोलकाता से मंगा कर पहले कम भूमि पर बिचड़ा तैयार किया जाता है बाद में उसे ढाई एकड़ भूमि पर लगाया जाता है।
 

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