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झारखंड में आदिवासियों का भरोसा नहीं जीत पाई BJP, गढ़ में कांग्रेस-JMM ने कर दिया क्लीन स्वीप

Jharkhand Lok Sabha Election Result: मंगलवार को देश में हुए लोकसभा चुनावों के नतीजे आए। इन चुनावों में झारखंड में भाजपा को झटका लगा। बीजेपी को प्रदेश की 5 एसटी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है।

झारखंड में आदिवासियों का भरोसा नहीं जीत पाई BJP, गढ़ में कांग्रेस-JMM ने कर दिया क्लीन स्वीप
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Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,रांचीWed, 05 Jun 2024 05:19 PM
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मंगलवार को देश में हुए लोकसभा चुनावों के नतीजे आए। इन चुनावों में झारखंड में भाजपा को झटका लगा। पिछली बार प्रदेश की 11 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा इस बार 8 सीटों तक ही सिमट गई। कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन ने पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़त हासिल कर ली। दोनों को मिलाकर 5 सीटों पर जीत मिली। ये सभी पांच सीटें आदिवासी बाहुल्य इलाके की हैं। पिछले कई सालों से भाजपा आदिवासियों का भरोसा जीतने का प्रयास कर रही है। हालांकि, भाजपा को इस प्रयास में अभी सफलता नहीं मिली है।

आदिवासियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने और समुदाय का विश्वास जीतने के लिए भाजपा ने पिछले 10 सालों में कई प्रयास किए। इस दौरान कई आदिवासी चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां भी दी गईं। साल 2019 में अर्जुन मुंडा को केंद्रीय कैबनेट में जगह दी गई। पार्टी छोड़कर जा चुके बाबूलाल मरांडी को फिर से पार्टी में शामिल करवाया गया और बाद में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया।

इतना ही नहीं भाजपा ने आदिवासी समुदाय से आने वाले राज्यसभा सांसद समीर उरांव को पार्टी के जनजातीय मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष और रांची की मेयर आशा लाकड़ो को पार्टी को राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया और राष्ट्रीय एससी/एसटी आयो का सदस्य भी बनाया गया। इसके साथ ही भाजपा ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति भी बना दिया। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में इन सभी प्रयासों का कोई लाभ भाजपा को नहीं मिला। भाजपा प्रदेश की पाचों लोकसभा सीटें हार गई। हालांकि, झारखंड के आसपास के राज्यों छत्तीसगढ़, उड़ीसा और मध्य प्रदेश में इसका असर देखने को मिला।

भाजपा ने प्रदेश की 5 एसटी सीटों पर कई बड़े चेहरों को प्रत्याशी के तौर पर उतारा था। इनमें अर्जुन मुंडा और समीर उरांव जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मैदान में थे। इनके साथ ही जेएमएम छोड़कर आईं शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन दुमका से और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं गीता कोड़ा सिंहभूम से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में थीं। भाजपा के ये सभी प्रत्याशी आदिवासियों का भरोसा जीतने में असफल रहे। इन सभी सीटों पर कांग्रेस और झामुमो प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।

झारखंड की 5 एसटी सीटों पर इंडिया गठबंधन द्वारा क्लीन स्वीप करने पर झामुमो नेता ने कहा कि वो जो भी करें, भाजपा ने आदिवासी समुदाय के बीच अपनी विश्वसनीयता खो दी। उन्होंने कहा कि आदिवासी लोग अब भाजपा को एक शोषक की तरह देखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य के संसाधनों को लूटने और उसे कार्पोरेट्स को सौंपने में रुचि रखती है।