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एक समय में दो घोड़ों की सवारी; ईडी ने बताया क्यों हेमंत सोरेन और केजरीवाल का मामला अलग

अदालत ने हेमंत सोरेन से सवाल किया कि क्या ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद कोई अदालत उनकी गिरफ्तारी की वैधता की जांच कर सकती है?

एक समय में दो घोड़ों की सवारी; ईडी ने बताया क्यों हेमंत सोरेन और केजरीवाल का मामला अलग
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांची नई दिल्लीWed, 22 May 2024 06:34 AM
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई होगी। मंगलवार को करीब डेढ़ घंटे तक दोनों पक्ष की ओर से दलीलें दी गईं। इस दौरान ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि चुनाव प्रचार के लिए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मामला कई आधारों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले से अलग है।

हेमंत और केजरीवाल का मामला अलग: ईडी
ईडी ने कहा कि सोरेन को आम चुनाव की घोषणा से काफी पहले जनवरी में ही गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा सोरेन के खिलाफ दाखिल अभियोजन शिकायत पर भी विशेष अदालत ने संज्ञान लिया है और इसका मतलब यह है कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

'एक समय में दो घोड़ों की सवारी'
ईडी ने कहा कि सोरेन गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए जमानत की मांग भी कर रहे थे, जो 'एक समय में दो घोड़ों की सवारी' के समान है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि वह अदालत को संतुष्ट करें कि लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए उनके मुवक्किल को अंतरिम जमानत कैसे दी जा सकती है, जबकि उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।

बुधवार को भी सुनवाई
पीठ ने कहा कि उसे इस बात से संतुष्ट होना होगा कि कोर्ट बाद के न्यायिक आदेशों के बावजूद गिरफ्तारी में हस्तक्षेप कर सकता है? इसके बाद सिब्बल ने इस पहलू पर विस्तार से जवाब देने के लिए समय देने की मांग की। इसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि हम याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेंगे।

कोर्ट ने पूछा सवाल
अदालत ने हेमंत सोरेन से सवाल किया कि क्या ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद कोई अदालत उनकी गिरफ्तारी की वैधता की जांच कर सकती है? जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की अवकाशकालीन पीठ के सवाल पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जमीन हड़पने का आरोप पीएमएलए के तहत अधिसूचित अपराध नहीं है। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि क्या मामले में गिरफ्तारी के बाद के न्यायिक आदेशों से गिरफ्तारी की छूट मिलेगी? वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि नहीं।

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत गिरफ्तार वरिष्ठ पत्रकार प्रबीर पुरकायस्थ बनाम भारत सरकार के मामले में कोर्ट के पिछले सप्ताह के फैसले का हवाला दिया। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि सोरेन का मामला और पुरकायस्थ के मामलों का तथ्य अलग है। जस्टिस दत्ता ने पूछा कि जब कोई न्यायिक आदेश संज्ञान ले रहा हो, जिसे चुनौती नहीं दी गई हो, तो क्या कोई रिट अदालत उस पर गौर कर सकती है?