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Hindi News झारखंडअवैध तरीके से जमीन कब्जाने में हेमंत सोरेन भी शामिल, झारखंड हाईकोर्ट को ED का जवाब

अवैध तरीके से जमीन कब्जाने में हेमंत सोरेन भी शामिल, झारखंड हाईकोर्ट को ED का जवाब

हेमंत सोरेन को 22 मई को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के खिलाफ अपनी याचिका में महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी आलोचना की।

अवैध तरीके से जमीन कब्जाने में हेमंत सोरेन भी शामिल, झारखंड हाईकोर्ट को ED का जवाब
Sourabh JainPTI,रांचीWed, 12 Jun 2024 07:53 PM
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट को बताया कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची के बारगेन इलाके में अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ईडी की ओर से एसवी राजू ने दलील देते हुए कहा कि सोरेन ने 2009-10 में जमीन का अधिग्रहण किया था और अपने कब्जे को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने एक चारदीवारी का निर्माण भी करवाया था।

ईडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच एजेंसी ने उस जमीन का स्वतंत्र सर्वेक्षण भी करवाया था और पूछताछ करने पर वहां मौजूद केयरटेकर ने बताया कि यह भूमि हेमंत सोरेन की है। इसके अलावा ईडी ने यह भी कहा कि उसने जमीन से जुड़े कई दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनसे पता चलता है कि सोरेन को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई थी।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने 27 मई को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मांगी थी। जिसके बाद कोर्ट ने ईडी से इस मामले में 12 जून को जवाब देने के लिए कहा था। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री को जमानत देने का अनुरोध करते हुए कोर्ट से कहा था कि झामुमो नेता को ईडी ने एक आपराधिक मामले में झूठा फंसाया है। ईडी ने सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उन्होंने उच्च न्यायालय से जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था।

सिब्बल ने पहले तर्क दिया था कि सोरेन पर बारगेन में 8.86 एकड़ के भूखंड पर कब्जा करने का गलत आरोप लगाया गया है और यह कृत्य मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन अधिनियम के तहत अपराध नहीं बनता है, जिसके लिए सोरेन को जेल भेजा गया है। जबकि ईडी ने आरोप लगाया है कि भूमि दस्तावेजों में फेरबदल करते हुए सोरेन ने जमीन के असली मालिकों को जबरन बेदखल कर दिया।

उधर सिब्बल ने अदालत से कहा कि मूल भूमि स्वामियों ने कभी शिकायत नहीं की या अधिकारियों से संपर्क नहीं किया, जब उनकी भूमि कथित तौर पर ली गई थी। उन्होंने कहा कि जबरन बेदखली का यह कृत्य 2009-10 में हुआ था, लेकिन रिपोर्ट 2023 में ही बनाई गई। सिब्बल ने तर्क दिया था कि भले ही सोरेन के खिलाफ सभी आरोप सही हों, लेकिन यह जबरन बेदखली का एक दीवानी मामला होगा, न कि आपराधिक मामला।

सिब्बल ने कहा कि आपराधिक मामला सोरेन को सलाखों के पीछे रखने के गुप्त उद्देश्य से प्रेरित था। उन्होंने आगे दावा किया कि ईडी ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और सोरेन को फंसाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार किए। मूल भूमि मालिक राज कुमार पाहन ने पहले ही अपने नाम पर भूमि की बहाली के लिए आवेदन कर दिया है, जिस पर कार्रवाई की जा रही है। सिब्बल ने दलील दी थी कि JMM नेता राजनीतिक साजिश का शिकार थे और उन्हें बिना सबूत के फंसाया गया था। 

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