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ईडी के खिलाफ ही दर्ज करा दिया झूठा केस, हेमंत सोरेन को लेकर जांच एजेंसी का बड़ा दावा

ईडी ने दावा किया है कि ऐसा हेमंत सोरेन ने इसलिए किया ताकी उनके खिलाफ चल रही अंतरिम जमानत की जांच रोकी जा सके। ऐसे में उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती।

ईडी के खिलाफ ही दर्ज करा दिया झूठा केस, हेमंत सोरेन को लेकर जांच एजेंसी का बड़ा दावा
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,रांचीTue, 21 May 2024 11:29 AM
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ फर्जी केस दर्ज कराने का आरोप लगाया है। ईडी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि झारखंड पुलिस ने हेमंत सोरेन के आदेश पर उसके अधिकारियों के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत फर्जी मामले दर्ज किए हैं। ईडी ने दावा किया है कि ऐसा हेमंत सोरेन ने इसलिए किया ताकी उनके खिलाफ चल रही अंतरिम जमानत की जांच रोकी जा सके। ऐसे में उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती।

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे  में हेमंत सोरेन की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा, उसने पीएमएलए के तहत अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए एससी/एसटी अधिनियम के तहत ईडी के जांच अधिकारियों पर झूठे मामले दर्ज किए हैं। ईडी ने कहा, अगर याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है तो जमानत के बाद, वह मामले में आगे की जांच को विफल करने के साथ-साथ गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए राज्य मशीनरी का दुरुपयोग करेंगे।

'राज्य सरकार ने नहीं की कोई कार्रवाई'

हलफनामे में कहा गया है कि ईडी की तरफ से जानकारी दिए जाने के बावजूद झारखंड सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।  ईडी ने लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत देने के उनके विशेष अनुरोधका भी विरोध किया। जांच एजेंसी ने न्यायालय में यह दलील दी कि एक राजनीतिक नेता एक सामान्य नागरिक से अधिक किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता। इस बात पर जोर देते हुए कि देश में चुनाव साल भर होते रहते हैं, जांच एजेंसी ने कहा कि अगर सोरेन की प्रार्थना स्वीकार कर ली जाती है, तो किसी भी राजनीतिक नेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

एजेंसी ने कहा कि 31 जनवरी को सोरेन की गिरफ्तारी को झारखंड हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है और उनकी नियमित जमानत याचिका 13 मई को निचली अदालत ने खारिज कर दी है। गिरफ्तारी के खिलाफ और अंतरिम जमानत के लिए सोरेन की अर्जी पर शीर्ष अदालत में 285 पन्नों के अपने हलफनामे में, जांच एजेंसी ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्य से यह स्थापित होता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता अवैध तरीके से संपत्तियां हासिल करने और उनपर कब्जा रखने में शामिल हैं, जो अपराध से अर्जित आय है।

एजेंसी ने कहा, पीएमएलए 2002 की धारा के तहत कई बयान दर्ज किए गए हैं, जिससे स्थापित होता है कि बरियातू में लालू खटाल के निकट शांति नगर में 8.86 एकड़ जमीन गैरकानूनी तरीके से हासिल की गई और यह हेमंत सोरेन के कब्जे और उपयोग में है और यह सब कुछ गुप्त तरीके से किया गया। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार अभियान के लिए सोरेन की अंतरिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए ईडी ने कहा, ‘‘यह गौर करना जरूरी है कि चुनाव में प्रचार करने का अधिकार न तो मूल अधिकार है, ना ही संवैधानिक अधिकार या कानूनी अधिकार है।’’

एजेंसी से इनपुट