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झारखंड के गढ़वा के पर्यटन स्थलों का विकास खोल सकता है समृद्धि का द्वार, श्रीबंशीधर मंदिर ए ग्रेड के अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल

सरकार की ओर से जिले के करीब 11 पर्यटनस्थलों को अबतक अधिसूचित किया गया है। इनमें नगर ऊंटारी स्थित श्रीबंशीधर मंदिर ए ग्रेड के अंतरराष्ट्रीय महत्व का पर्यटन स्थल है।

झारखंड के गढ़वा के पर्यटन स्थलों का विकास खोल सकता है समृद्धि का द्वार, श्रीबंशीधर मंदिर ए ग्रेड के अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल
Devesh Mishraओमप्रकाश पाठक,गढ़वाWed, 21 Feb 2024 11:11 PM
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ब्रिटिश शासन में झारखंड का गढ़वा कभी लाह, तेलहन, जानवरों के खाल और घी के कारोबार का केंद्र होता था। उस दौरान आमदनी का यह अच्छा जरिया था। बदलते समय में आर्थिक गतिविधियां भी बदलीं। लाह और घी का कारोबार करीब-करीब बंद हो गया। जानवरों के खाल का कारोबार भी प्रतिबंधित है। अब आर्थिक गतिविधियां कृषि आधारित हो गई हैं। कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि की स्थिति खेती-किसानी के काम में खलल उत्पन्न करती हैं। भवनाथपुर में चूना पत्थर और डोलोमाइट आधारित औद्योगिक गतिविधियां बंद हो गई हैं। इन परिस्थितियों में गढ़वा के पर्यटन स्थलों का विकास समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं। गढ़वा में अंतरराष्ट्रीय से लेकर राज्य व स्थानीय महत्व के पर्यटनस्थलों की भरमार है।

अबतक 11 पर्यटन स्थलों को किया गया है अधिसूचित
सरकार की ओर से जिले के करीब 11 पर्यटनस्थलों को अबतक अधिसूचित किया गया है। इनमें नगर ऊंटारी स्थित श्रीबंशीधर मंदिर ए ग्रेड के अंतरराष्ट्रीय महत्व का पर्यटन स्थल है। मंदिर में 32 मन यानी 1280 किलोग्राम शुद्ध सोने की भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित है। श्रीकृष्ण की आदमकद प्रतिमा करीब साढ़े चार फीट की है। नगर ऊंटारी राजपरिवार के संरक्षण में यह मंदिर देश व विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वहीं स्थानीय लोगों के लिए आस्था व विश्वास का केंद्र बना हुआ है। श्री बंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव वृंदावन के तर्ज पर बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीबंशीधर मंदिर से जुड़ी यह भी कहानी है कि मुगल काल में आक्रमणकारियों से बचाने के लिए किसी अज्ञात राजा ने मंदिर की इस प्रतिमा को छिपा दिया था।

खुदाई में मिली थी श्रीकृष्ण की अद्भुत प्रतिमा
पुजारी रिद्धेश्वर तिवारी के द्वारा मंदिर के गुंबद पर लिखित इतिहास के अनुसार संवत 1885 में श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त नगरगढ़ के महाराज स्वर्गीय भवानी सिंह की विधवा रानी शिवमणि देवी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन थीं। मध्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने रानी के स्वप्न में आकर दर्शन दिए। रात में देखे स्वप्न के अनुसार रानी अपने लाव लश्कर के साथ करीब 20 किलोमीटर पश्चिम सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के दुद्धी थाना क्षेत्र के शिवपहरी नामक पहाड़ी पर पहुंची। वहां की गई खुदाई में श्रीकृष्ण की अद्भुत प्रतिमा मिली थी।

श्रीकृष्ण सर्किट से नहीं जोड़ा जा सका
मंदिर के विकास को गति दिलाने के प्रयास में श्रीबंशीधर मंदिर को श्रीकृष्ण सर्किट से जोड़ने के लिए सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में मांग की थी। उस पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अधीन स्वदेश दर्शन के सहायक निदेशक पावस प्रसून ने झारखंड पर्यटन मंत्रालय से श्रीबंशीधर मंदिर के पुरातात्विक व ऐतिहासिक महत्व से संबंधित रिपोर्ट की मांग की थी। उसके बाद से अबतक श्रीबंशीधर मंदिर को श्रीकृष्ण सर्किट से नहीं जोड़ा जा सका। राज्य सरकार की ओर से भी इसके विकास के लिए अबतक तीन बार श्रीबंशीधर महोत्सव का आयोजन किया जा चुका है।

राज्यस्तरीय महत्व के पर्यटन स्थल के तौर पर कई अधिसूचित
इसके अलावा कांडी प्रखंड का सतबहिनी झरना, धुरकी प्रखंड का सुखलदरी जलप्रपात के अलावा केतार स्थित मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर राज्यस्तरीय महत्व के पर्यटन स्थल के तौर पर अधिसूचित किया जा चुका है। वहीं, चिनिया प्रखंड के गुरुसिंधु जलप्रपात, जिला मुख्यालय स्थित मां गढ़देवी मंदिर, अन्नराज डैम व बाबा खोन्हरनाथ मंदिर, रंका प्रखंड का नक्षत्र वन व भलपहड़ी मंदिर के अलावा नगर ऊंटारी स्थित राजा पहाड़ी मंदिर को स्थानीय स्तर के महत्व के अधिसूचित पर्यटन स्थल हैं। अधिसूचित पर्यटनस्थल की सूची में तीन अन्य स्थलों को सरकार की ओर से हाल ही में शामिल किया गया है। उनमें रमना प्रखंड के सिलिदाग स्थित चांदराज पहाड़ी, जिरुवा बांध व केतार प्रखंड का सूर्य नारायण वन शामिल है। वर्तमान में जिला प्रशासन की ओर से सदर प्रखंड के खजुरी में स्थित ब्रह्मस्थान लगमा को पर्यटन स्थल के रूप में अधिसूचित करने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। कुछ अन्य स्थानीय महत्व के पर्यटनस्थल हैं, जिन्हें अबतक अधिसूचित नहीं किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से पर्यटनस्थलों के विकास के लिए छह साल में 11 करोड़ खर्च किए गए हैं। उसके बाद भी पर्यटनस्थलों को रोजगार सृजन के नजरिए से देखने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र में ये रोजगार व समृद्धि का सशक्त जरिया बन सके।

क्या कहते हैं अधिकारी
गढ़वा के डीडीसी पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा, 'गढ़वा जिले में पर्यटन क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। जिले के पर्यटन स्थलों को विकसित बनाने के लिए जिला प्रशासन कटिबद्ध है। हाल के दिनों में जिले के पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए कई कार्य हुए हैं। पर्यटन विकास विभाग से भी कई कार्य कराए गए हैं। जिला प्रशासन का यह प्रयास है कि पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाए, ताकि दूसरे प्रदेशों और अन्य जगहों से पर्यटक पहुंचे। उससे रोजगार के क्षेत्र में वृद्धि होगी। क्षेत्र में समृद्धि भी आएगी।' 

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