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23 सितम्बर, 2020|6:05|IST

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कारोबार पर संकट : कोल्हान में 15 हजार मजदूर चुनते हैं केंदू पत्ता, पर अब कहानी उलट, पढ़ें ये खबर

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कोल्हान में जीएसटी की मार से केंदू पत्ता का कारोबार बेजार होने लगा है। केंदू पत्ता चुनने वाले लगभग 15 हजार मजदूरों की रोजी-रोटी संकट है। 

वन विभाग का मानना है कि जहां हर साल केंदू पत्ता का कारोबार लगभग 14 से 15 करोड़ रुपये तक चला जाता था, इस बार लगभग 88 लाख रुपये में ही सिमट गया है। कुछ कोरोना संक्रमण का असर भी है। हालांकि, अधिक असर जीएसटी का है। केंदू पत्ता सूखे पर लगभग 28 प्रतिशत और तंबाकू वाले पर 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाना पड़ता है। इसके चलते बीड़ी बनाने वाले कारोबारियों को यह काफी महंगा पड़ रहा है। इसके अलावा केंदू पता के खरीदारों को परिवहन खर्च भी अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है। यही कारण है कि हाल के कुछ दिनों से केंदू पत्ता का कारोबार में काफी गिरावट आई है। कोल्हान में वन विभाग के नोटिफाइड इल्ड में छह रेंज हैं, जिनमें लगभग 15 हजार केंदू पत्ता चुनने वाले मजदूर हैं। इनमें आनंदपुर, गोयलकेरा, चक्रधरपुर, चाकुलिया व मानगो रेंज हैं। 50 हजार पत्ता संग्रह करने वाले मजदूरों को 900 रुपये पारिश्रमिक दिया जाता है। कोलकाता और धूलियान में कोल्हान के केंदू पत्तों की सप्लाई की जाती है। कुछ स्थानीय कंपनियां भी खरीदकर ले जाती हैं। 

वहीं, केंदू पत्ता क्रेता संघ के अध्यक्ष मिट्ठू पांडेय का कहना है कि निगम का कानून काफी टेढ़ा है। बाजार में मंदी के कारण प्रत्येक राज्य में रिजर्व कीमत में संशोधन कर दिया है। झारखंड में कोई सुधार नहीं किया गया। तोड़ाई का पास पहले जमा करा लेते हैं। मजदूरों को पैसा नहीं देते हैं। अभी तक विभाग ने पिछले साल का पैसा मजदूरों भुगतान नहीं किया है। दूसरे राज्यों मे तोड़ाई का पैसा सरकार देती है। इससे खरीदारों को काफी परेशानी होती है। 
 

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  • Web Title:Crisis on business: 15 thousand workers choose Kendu leaves in Kolhan but now the story is reversed read this news