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हिंदी न्यूज़ झारखंडलगातार बारिश से कोयला खदानों में बुरा हाल, ऐसा ही रहा तो गहरा सकता है बिजली संकट

लगातार बारिश से कोयला खदानों में बुरा हाल, ऐसा ही रहा तो गहरा सकता है बिजली संकट

हिन्‍दुस्‍तान टीम ,रांची धनबाद Ajay Singh
Tue, 19 Oct 2021 06:41 AM
लगातार बारिश से कोयला खदानों में बुरा हाल, ऐसा ही रहा तो गहरा सकता है बिजली संकट

झारखंड और बंगाल के कई हिस्सों में बीते दो दिन से हो रही बारिश के कारण राज्य में कोयले और बिजली का उत्पादन एक बार फिर प्रभावित हुआ है। इसके कारण एक बार फिर बिजली संकट गहराने के आसार बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा असर कोयला उत्पादन पर पड़ा है।

कोयला कंपनियों की ओर से आधिकारिक बयान के अनुसार झारखंड और बंगाल में स्थित कोयला खदानों पर बारिश का व्यापक असर पड़ा है। कोयला उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। डिस्पैच भी 30 से 40 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। बीसीसीएल, सीसीएल एवं ईसीएल के उत्पादन व डिस्पैच पर असर पड़ा है। ईसीएल की झारखंड व बंगाल स्थित कोयला खदानें प्रभावित हुई हैं। बीसीसीएल व सीसीएल के कुछ एरिया में बारिश से बुरा हाल है।

आधिकारिक बयान के अनुसार कोयला उत्पादन नहीं के बराबर हुआ। कुछ डिपार्टमेंटल उत्पादन ही हुआ। आऊटसोर्सिंग परियोजनाएं बंद रही। मालूम हो कि झारखंड से देश के तकरीबन 11 राज्यों को कोयला आपूर्ति की जाती है। इनमें राजधानी दिल्ली के पावर प्लांटों सहित पंजाब, हरियाणा, बंगाल,यूपी, बिहार जैसे प्रमुख राज्य हैं। बारिश के पहले दुर्गा पूजा के दौरान भी कोयला उत्पादन एवं डिस्पैच प्रभावित हुई है। नवमी एवं दसवीं के दिन कई क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट बंद रहने से कोयला डिस्पैच पर खासा असर पड़ा है। ईसीएल में नवमी एवं दसवीं को एक लाख टन की जगह 44 एवं 46 हजार टन ही कोयला डिस्पैच हुआ। बीसीसीएल में नवमी को 39.8 एवं दसवीं को 25.2 हजार टन कोयला डिस्पैच किया जा सका। सीसीएल में भी डिस्पैच में कमी आई है।

शार्टेज है लेकिन क्राइसिस की स्थिति नहीं : दत्ता

कोल इंडिया सह बीसीसीएल के निदेशक वित्त समीरन दत्ता ने कहा कि बारिश से कुछ कोयला कंपनियों में असर पड़ा है। खासकर झारखंड व बंगाल में। वैसे घबराने की जरूरत नहीं है। कोयला शार्टेज है लेकिन क्राइसिस की स्थिति नहीं है। बारिश थमने पर एक सप्ताह के अंदर पावर प्लांटों के कोयला स्टॉक में सुधार हो जाएगा। कोल इंडिया के पास 40 मिलियन टन का अभी भी कोयला स्टॉक है। लगातार स्थिति बेहतर करने की कोशिश हो रही है।

बारिश से ईसीएल के उत्पादन में 50%कमी : रेड्डी

ईसीएल के निदेशक तकनीक बी बीरा रेड्डी ने कहा कि सोमवार की बारिश का ईसीएल के कोयला उत्पादन व डिस्पैच पर खासा असर पड़ा है। ईसीएल की झारखंड एवं बंगाल स्थिति सभी खदानें प्रभावित हुई हैं। अनुमान के अनुसार 50 प्रतिशत तक उत्पादन पर असर पड़ा है। औसतन एक लाख टन कोयला उत्पादन प्रतिदिन होता है। सोमवार को ईसीएल में 50 हजार टन ही उत्पादन होने की स्थिति है।

बिजली की आंखमिचौनी

सूबे में बारिश के कारण लोकल फॉल्ट बढ़ गए। इन कारणों से बिजली की उपलब्धता मांग से 51 मेगावाट अधिक रही। सूबे में बिजली की मांग 1290 मेगावाट पहुंची जबकि आपूर्ति के लिये 1341 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। लेकिन बारिश से लोकल फॉल्ट होते रहे जो बिजली की आंखमिचौली का कारण बने। लगातार बारिश के कारण सूबे में बिजली की मांग सामान्य दिनों में 1700 मेगावाट के मुकाबले घटकर 1290 मेगावाट पर सीमित रह गई। राज्य को एनटीपीसी और डीवीसी की उत्पादन इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण बिजली कम मिल रही है।

दो दिन बारिश से राहत नहीं

रांची। बंगाल की खाड़ी में बने एक नए लो प्रेशर सिस्टम की कारण सोमवार को राज्य के कई जिलों में अच्छी बर्षा हुई। आने वाले दो दिन तक राज्य में मौसम में बदलाव नहीं होगा। मंगलवार और बुधवार को रांची, खूंटी, गुमला,रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, साहेबगंज और पाकुड़ जिला में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं। इसके अलावा अन्य स्थान पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होगी। इस दौरान मेघ गर्जन और वज्रपात भी हो सकता है।

सिकिदरी हाइड्रो पावर की मरम्मत शुरू

 

राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश से बिजली की मांग में काफी कमी आई है। मांग में कमी के कारण सिकिदरी पन बिजली की दोनों इकाइयों से शाम साढ़े पांच बजे उत्पादन बंद कर मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। मांग में कमी से राहत हुई। क्योंकि, बारिश से कोयले के खनन पर असर हुआ है। बिजली उत्पादन इकाइयों का उत्पादन पूरी क्षमता से नहीं हो पाने के कारण झारखंड बिजली वितरण निगम को तय कोटे से कम बिजली मिली। ऐसा होने पर भी लोड शेडिंग की नौबत नहीं आई।

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