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झारखंड सरकार में बढ़ सकता है कांग्रेस के मंत्री बन्ना गुप्ता का कद, क्यों लगने लगीं अटकलें

लोकसभा चुनाव में पांचों एसटी सीटें जीतने के बाद इंडिया गठबंधन इस बात से तो बेफ्रिक है कि नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट ज्यादा से ज्यादा उनके पक्ष में ही रहेगा।

झारखंड सरकार में बढ़ सकता है कांग्रेस के मंत्री बन्ना गुप्ता का कद, क्यों लगने लगीं अटकलें
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीMon, 17 Jun 2024 06:25 AM
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मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की अध्यक्षता में पिछले मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में विभागों की एक समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री के ठीक बगल सीट में वरीयता क्रम में पहले आने वाले मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव की जगह मंत्री बन्ना गुप्ता को जगह दी गई। उसके बाद से यह चर्चा जोरों से है कि सरकार में मंत्री बन्ना गुप्ता का कद बढ़ने वाला है।

पूर्व की हेमंत सोरेन सरकार और जेल जाने से पहले तक चंपाई सरकार में मुख्यमंत्री के बाद वरीयता क्रम में आलमगीर आलम का स्थान होता था। मुख्यमंत्री आवास में चाहे इंडिया गठबंधन की बैठक हो या सचिवालय में विभागों की समीक्षा, सभी में मुख्यमंत्री के बगल में हमेशा आलमगीर आलम ही बैठे देखे जाते थे। मंगलवार की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के बगल में बन्ना बैठे न कि डॉ उरांव। समीक्षा बैठक में उपस्थित सभी आला अधिकारी भी इससे काफी अचंभित हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में मुख्यमंत्री के बगल में डॉ उरांव के बैठे जाने का नेम प्लेट लगा था। हालांकि बाद में इस नेम प्लेट की जगह मंत्री बन्ना गुप्ता का नेम प्लेट लगा दिया गया।

ओबीसी वोट बैंक साधने की कांग्रेस की बड़ी कोशिश
लोकसभा चुनाव में पांचों एसटी सीटें जीतने के बाद इंडिया गठबंधन इस बात से तो बेफ्रिक है कि नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट ज्यादा से ज्यादा उनके पक्ष में ही रहेगा। गठबंधन के घटक दलों खासकर कांग्रेस पार्टी की चिंता ओबीसी वोट बैंक की है। केंद्र के मोदी कैबिनेट में जिस तरह ओबीसी वर्ग से आने वाले अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ को जगह दी गई, उसे देख इंडिया गठबंधन की यह चिंता और भी बढ़ गई है। राजनीति में एक अहम वोट बैंक कुरमी की एक बड़ी आबादी एनडीए घटक दल वाली आजसू के साथ है। फिलहाल कांग्रेस के पास ओबीसी वर्ग से बन्ना गुप्ता, प्रदीप यादव, दीपिका पांडेय सिंह, अंबा प्रसाद, जयप्रकाश भाई पटेल सरीके नेता हैं। इस बारे में जब मंत्री बन्ना गुप्ता से बातचीत करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बात करने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, मंत्री रामेश्वर उरांव से भी बातचीत करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।

वरीयता में बन्ना पीछे, आलमगीर के बाद डॉ उरांव का स्थान
दरअसल पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के मंत्री पद छोड़े जाने के बाद से ही कांग्रेस विधायक दल के नेता का पद खाली है। मुख्यमंत्री के बगल में बन्ना की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि उन्हें यह पद दिया जा सकता है। लेकिन यहां एक तकनीकी पेच भी बन सकता है। हेमंत सोरेन के 29 दिसंबर 2019 को ली गई शपथ में उनके साथ आलमगीर आलम, डॉ रामेश्वर उरांव और सत्यानंद भोक्ता ने शपथ ली थी। उसके करीब एक माह बाद यानी 28 जनवरी 2020 को अन्य मंत्री जिनमें बन्ना गुप्ता भी थे, ने शपथ ली। कैबिनेट में वरीयता का क्रम हमेशा शपथ लेने के आधार पर निर्धारित होता है। आलमगीर के हटने के बाद वरीयता के क्रम में डॉ. उरांव का स्थान आता है। लेकिन उनकी जगह मंत्री बन्ना गुप्ता को मुख्यमंत्री के बगल में जगह दी गई। ऐसे में मंत्री बन्ना का कद बढ़ाने के लिए सरकार एक नोटिफिकेशन भी जारी कर सकती है। 

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