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हिंदी न्यूज़ झारखंडपंकज मिश्रा के खिलाफ केस करने वाले विजय का सनसनीखेज आरोप, कहा- मिल रही धमकी

पंकज मिश्रा के खिलाफ केस करने वाले विजय का सनसनीखेज आरोप, कहा- मिल रही धमकी

ईडी के गवाह विजय हांसदा को आर्म्स एक्ट के केस में जेल भेजने के मामले में साहिबगंज पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। विजय हांसदा ने बताया है कि उसे लगातार धमकाया जा रहा था।

पंकज मिश्रा के खिलाफ केस करने वाले विजय का सनसनीखेज आरोप, कहा- मिल रही धमकी
Suraj Thakurमुख्य संवाददाता,रांचीTue, 06 Dec 2022 08:15 AM

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ईडी के गवाह विजय हांसदा को आर्म्स एक्ट के केस में जेल भेजने के मामले में साहिबगंज पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। विजय हांसदा ने ईडी को दिए बयान में बताया है कि पंकज मिश्रा के खिलाफ थाने व फिर कोर्ट में शिकायत के बाद लगातार उसे धमकी मिल रही थी। विजय हांसदा का आरोप है कि 11 नवंबर को साहिबगंज की जिरवाबाड़ी थाने की पुलिस ने उसे व उसके बेटे मनोज को घर से उठाया। इसके बाद उसे जिरवाबाड़ी थाने ले जाया गया। विजय ने बताया कि पुलिस वाले हथियार लेकर आए, इसके बाद हथियार के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखाते हुए जेल भेज दिया गया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस का क्या है दावा 
विजय हांसदा की गिरफ्तारी के बाद साहिबगंज पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। इसमें बताया गया था कि जिरवाबाड़ी के एसआई अनुपम प्रकाश को सूचना मिली थी कि ग्राम भवानी चौकी के पास विजय हांसदा व मनोज हांसदा के द्वारा ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है। इसके बाद टीम गठित कर एसआई प्रकाश रंजन, एएसआई ब्रजनंदन चौधरी ने सशस्त्र बल के साथ छापेमारी की। इस दौरान हथियार के साथ विजय व मनोज को गिरफ्तार करने की बात पुलिस ने कही थी। पुलिस ने 2 देसी राइफल बरामदगी की जानकारी भी मीडिया को दी थी।

केस में पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
जिस केस में परशुराम यादव को नोटिस किया गया है, उस केस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा आरोपी हैं। नींबू पहाड़ी पर अवैध खनन के केस में पुलिस ने काफी दबाव के बाद हाल ही में केस किया है। पूर्व में इसी केस को रफा-दफा करने का आरोप विजय ने लगाया था। इस केस में विजय के ही मददगार को पूछताछ के लिए तलब करने को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

केस वापसी के लिए सादे कागज पर हस्ताक्षर
विजय ने ईडी को बताया है कि नींबू पहाड़ी पर अवैध खनन के मामले में पंकज मिश्रा के खिलाफ उसने थाने में शिकायत की थी, लेकिन थाना ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में वह कोर्ट गया, जहां कोर्ट कंप्लेन के बाद केस करने का आदेश कोर्ट ने दिया। लेकिन इसके बाद से पुलिस लगातार केस वापसी का दबाव डालने लगी।

केस वापस लेने के लिए जबरन सादे कागज पर हस्ताक्षर लिया गया। इस दौरान पुलिस पास आए लोगों के पास एसपी ऑफिस से लगातार कॉल आ रहा था। जेल भेजकर पुलिस ने उस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, जिसमें पंकज मिश्रा को उसने आरोपी बनाया था।