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ब्लैक फंगस से मौत मामले की जांच करेगी विशेषज्ञों की कमेटी, तीन सदस्यीय टीम बनाई गई

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरोPublished By: Yogesh Yadav
Tue, 03 Aug 2021 12:08 AM
ब्लैक फंगस से मौत मामले की जांच करेगी विशेषज्ञों की कमेटी, तीन सदस्यीय टीम बनाई गई

रिम्स में ब्लैक फंगस से पीड़ित गिरिडीह के पचंबा की 45 वर्षीय उषा देवी की मौत के मामले में बरती गयी लापरवाही की जांच विशेषज्ञों की कमेटी करेगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। एमजीएम, जमशेदपुर के ईएनटी एचओडी प्रो. डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी में निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य के तकनीकी सलाहकार डॉ. राकेश दयाल और सदर अस्पताल, रांची के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार को शामिल किया गया है। कमेटी को मामले की अविलंब जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है। 

हाईकोर्ट की पहल पर डेढ़ माह बाद रिम्स में हुई सर्जरी

उषा देवी 5 मई को कोविड पॉजिटिव हुई थी। म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) की पुष्टि होने के बाद बाद गिरिडीह के सदर अस्पताल से इन्हें रिम्स रेफर कर दिया गया था। 17 मई को उन्हें रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। महिला के बेटे गौरव गुप्ता के अनुसार इलाज के दौरान ही उनकी मां की बायीं आंख की रोशनी भी चली गई। रिम्स में ऑपरेशन के नाम पर डॉक्टर टाल-मटोल कर रहे थे और फिर महिला को इलाज के लिए बाहर ले जाने को कहा गया। परिवार की माली हालत को देखते हुए उषा देवी के बच्चों की मांग थी कि या तो रिम्स में उनकी मां का बेहतर इलाज कराई जाए या फिर सरकार इच्छा मृत्यु की इजाजत दे। परिजनों ने रिम्स परिसर में धरना भी दिया था। इस मामले पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और उषा देवी का समुचित इलाज करने के निर्देश दिया।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद रिम्स में 8 जुलाई को महिला का ऑपरेशन किया गया। लेकिन उसके बाद उसकी स्थिति बिगड़ती चली गयी। ऑपरेशन के 72 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। गौरव गुप्ता का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद आंख की सर्जरी वाले हिस्से से खून बह रहा था। डॉक्टरों ने रात में माइनर सर्जरी कर उसकी मां को वेंटिलेटर पर रखा। सुबह स्थिति बिगड़ी तो कोई देखने नहीं आया। ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल गिरने से उसकी मां की मौत हो गई।

बरियातु थाने में डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत 

उषा देवी के बेटे गौरव गुप्ता ने इलाज में लापरवाही बताते हुए रिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ बरियातू थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने रिम्स निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद, अधीक्षक डॉ. विवेक कश्यप समेत ऑपरेशन करने वाले डॉ. संजय कुमार, डॉ. सीके बिरुआ, डॉ. मनीष, डॉ. आयुष प्रवीण, डॉ. आलोक प्रिया, डॉ. शिव प्रिया, डॉ. राकेश चौधरी, डॉ. अंसारी को आरोपी बनाया है।

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