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झारखंड

कोयले की मार: बोकारो के बीटीपीएस में बिजली उत्पादन घटा, टीटीपीएस में भी क्षमता से कम स्टॉक

बेरमो प्रतिनिधिPublished By: Yogesh Yadav
Mon, 11 Oct 2021 09:12 PM
कोयले की मार: बोकारो के बीटीपीएस में बिजली उत्पादन घटा, टीटीपीएस में भी क्षमता से कम स्टॉक

कोरोना काल के साथ-साथ बारिश के कारण कोल इंडिया में कोयला उत्पादन में आई कमी का असर देश की बिजली व्यवस्था पर पड़ने लगा है। झारखंड में भी यही हालात हैं। बोकारो जिले में बेरमो अनुमंडल के तीनों पावर प्लांट से बिजली उत्पादन में कमी आ गई है। कोयले की आपूर्ति में लगातार कटौती के कारण यह विकट स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में बिजली आपूर्ति के हालात और भी बुरे हो सकते हैं। साथ ही झारखंड में भी बिजली वितरण पर असर पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। मालूम हो कि डीवीसी अपनी उत्पादित बिजली को नेशनल ग्रीड में देती है। फिर सीएलडी मैथन से बिजली सप्लाई की जाती है।

बीटीपीएस ने उत्पादन घटाया

डीवीसी की इकाई बीटीपीएस यानी बोकारो थर्मल पावर स्टेशन में कुछ दिनों से 100 मेगावाट बिजली उत्पादन कम हो गया है। ऐसे में 500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले नए ए पावर प्लांट से 400 मेगावाट ही बिजली उत्पादन किया जा रहा है। कोयले की अतिरिक्त आपूर्ति नहीं होने तथा त्योहारों में बिजली संकट की स्थिति नहीं पैदा हो, इसके लिए बिजली उत्पादन कम कर प्लांट को चलाया जा रहा है। इस प्लांट को चलाने के लिए प्रतिदिन 5-6 हजार एमटी कोयले की खपत होती है। ऐसे में अभी 5 दिन से ज्यादा का कोल स्टॉक है।

सीटीपीएस में कोल स्टॉक अब शेष

डीवीसी की इकाई सीटीपीएस यानी चन्द्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन में 250 -250 मेगावाट की दो यूनिट है। वर्तमान समय में बिजली उत्पादन पर अबतक असर नहीं पड़ा है। परंतु कोल स्टॉक शेष है। महज 3 दिन का ही कोयला स्टॉक में अभी है। हालांकि राहत की बात है कि 1-2 रैक कोयला प्रतिदिन आ रहा है। इस प्लांट को चलाने में 6 हजार एमटी कोयला प्रतिदिन खपत है।

टीटीपीएस की तो एक ही यूनिट चल रही

टीटीपीएस यानी तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन की तो एक ही यूनिट चल रही है। 210-210 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की यहां दो यूनिट है। एक यूनिट तो कब से बंद है। जबकि दूसरी यूनिट से 160-170 मेगावाट ही बिजली उत्पादन अभी मौजूदा समय में हो रहा है। यहां भी महज 3 दिन का कोयला स्टॉक में है। वैसे 1 से 2 रैक कोयला प्रतिदिन आ रहा है। इस प्लांट को चलाने में 3 हजार एमटी कोयला प्रतिदिन खपत होती है।

डीवीसी की बिजली की कहां-कहां आपूर्ति

डीवीसी की बिजली बांग्लादेश के अलावा दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, बिहार व झारखंड सहित रेलवे, कोल इंडिया, सेल, टाटा व जिंदल स्टील, दिल्ली डिस्कोम्स तथा निजी कल-करखानों को आपूर्ति की जाती है। यह वितरण सीएलडी मैथन से किया जाता है।

झारखंड सरकार डीवीसी से प्रतिदिन 465 मेगावाट बिजली खरीदती है

हर महीने डीवीसी से 465 मेगावाट बिजली झारखंड सरकार खरीदती है। इसकी राशि करीब 155 करोड़ होती है। 6 महीने का करीब 930 करोड़ बकाया है। डीवीसी की ओर से झारखंड में बोकारो, धनबाद, रामगढ़, गिरिडीह, हजारीबाग व चतरा के कुछ प्रखंडों में बिजली आपूर्ति की जा रही है।

टीटीपीएस की बिजली बिहार शरीफ व पतरातू ट्रांसमिशन लाइन में

टीटीपीएस की उत्पादित बिजली को सीधे तौर पर वितरकों में आपूर्ति नहीं किया जाता। बिहारशरीफ व पतरातू ट्रांसमिशन लाइन को बिजली दी जाती है, फिर वहां से वितरण किया जाता है।

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