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खतियानी जोहार यात्रा से क्या हासिल करना चाहते हैं सीएम हेमंत सोरेन, 8 दिसंबर से होगी शुरुआत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 8 दिसंबर से खतियानी जोहार यात्रा की शुरुआत करेंगे। यात्रा के पहले चरण में 8 दिसंबर को सीएम हेमंत सोरेन गढ़वा जाएंगे। 9 दिसंबर को पलामू जाने की योजना है। तैयारी हो रही है।

खतियानी जोहार यात्रा से क्या हासिल करना चाहते हैं सीएम हेमंत सोरेन, 8 दिसंबर से होगी शुरुआत
Suraj Thakurलाइव हिन्दुस्तान,रांचीTue, 06 Dec 2022 07:50 AM
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 8 दिसंबर से खतियानी जोहार यात्रा की शुरुआत करेंगे। यात्रा के पहले चरण में 8 दिसंबर को सीएम हेमंत सोरेन गढ़वा जाएंगे। 9 दिसंबर को पलामू जाने की योजना है। 12 दिसंबर को दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल का दौरा होगा। सीएम गुमला जाएंगे। 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लोहरदगा जाएंगे। दूसरे चरण में मुख्यमंत्री संताल परगना प्रमंडल का दौरा करेंगे। सीएम 15 दिसंबर को गोड्डा में होंगे और 16 दिसंबर को देवघर जाएंगे। मुख्यमंत्री की इस यात्रा को जहां झामुमो जनता से सीधे संवाद का तरीका बता रही है तो वही राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मुख्यमंत्री विपक्ष को रणनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेलने और आगामी चुनावों के लिहाज से जनता को साधने जा रहे हैं। 

11 नवंबर को विधानसभा से पास हुआ था विधेयक
गौरतलब है कि हेमंत सोरेन सरकार ने बीते 11 नवंबर को विधानसभा का 1 दिवसीय विशेष सत्र बुलाकर 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति को सदन से पास करा लिया। इसे अब संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार इसे बड़ी सियासी जीत के तौर पर देख रही है क्योंकि झारखंड में लंबे समय से इसकी मांग रही है। जनवरी 2022 से इसे लेकर खूब आंदोलन भी हुए। सियासी जानकारों का मानना है कि झारखंड में 1932 का खतियान जनभावना से जुड़ा मुद्दा है। आदिवासियों को इसके जरिए लामबंद किया जा सकता है। शायद यही वजह रही कि किसी भी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया। हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने जरूर कहा कि इसे केंद्र के पास भेजने की जरूरत नहीं थी। सरकार संकल्प पारित करा कर भी इसे लागू कर सकती थी। 

खतियान आधारित स्थानीय नीति पर जनता की राय
झारखंड मुक्ति मोर्चा भले ही सार्वजनिक मंचों से 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति को विधानसभा से पारित करा लेने को बड़ी सियासी जीत बताती हो लेकिन सियासी गलियारों में एक तबका ऐसा भी है जिसका मानना है कि झामुमो अथवा गठबंधन सरकार इसका उतना लाभ नहीं ले सकी जितनी उम्मीद थी। आम जन में इसे लेकर एक उदासीनता है। केंद्र के पाले में गेंद डालने का जो दांव सरकार ने चला था, बीजेपी संभवत जनता को ये बताने में कामयाब रही है कि खतियान आधारित स्थानीय दरअसल, सरकार का चुनावी स्टंट भर है। ऐसे में सियासी पंडितों का मानना है कि अब मुख्यमंत्री खुद जनता के बीच जा-जाकर खतियान आधारित स्थानीय नीति का प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं ताकि उनका मास्टरस्ट्रोक कहीं फेल ना हो जाए। हाल ही में मंत्री मिथिलेश ठाकुर की अगुवाई में हुई झामुमो की बैठक में यह तय किया गया कि पोस्टर और बैनरों के जरिए कार्यकर्ता लोगों के बीच खतियानी जोहार यात्रा का प्रचार करेंगे। लोगों के बीच बताएंगे। 

कानूनी रूप से मुश्किलों में घिरे हैं सीएम हेमंत सोरेन
बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस समय कानूनी रूप से दो-दो चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एक ओर जहां खनन पट्टा लीज को लेकर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग का मंतव्य राजभवन आ चुका है। हालांकि, राज्यपाल ने इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया वहीं दूसरी ओर वह साहिबगंज में हुए 1000 करोड़ रुपये के अवैध खनन मामले में ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। 17 नवंबर को उनसे पूछताछ भी हुई है। आगे भी उन्हें बुलाया जा सकता है। साहिबगंज में हुए अवैध खनन मामले में जिस प्रकार नित्य-नए खुलासे हो रहे हैं, बीजेपी ने सरकार को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में खतियानी जोहार यात्रा मुख्यमंत्री और सरकार दोनों के लिए सिसायी संजीवनी का काम कर सकता है। वैसे भी सीएम हेमंत सार्वजनिक मंचों से कहते रहे हैं कि विपक्ष उनके विकास कार्यों और आदिवासी मुख्यमंत्री होने की बात को पचा नहीं पा रहा। 

क्या! जनता को लामबंद कर पाएंगे सीएम हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की खतियानी जोहार यात्रा 8 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। उस दिन गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आने हैं। देखना होगा कि मुख्यमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान जनता से कैसा संवाद करते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा को इसका कितना सियासी फायदा मिल सकता है। 2024 में यहां विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। खतियानी जोहार यात्रा को विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। देखना ये भी दिलचस्प होगा कि मुख्य विपक्षी बीजेपी इसे लेकर क्या प्रतिक्रिया जाहिर करती है।