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पलामू के 96 गांवों की बदलेगी तस्वीर, CM ने रखी 4.57 अरब की सिंचाई योजना की नींव

दशकों से सुखाड़ की मार झेल रहे पलामू जिले के 96 गांवों की तस्वीर अब बदलने वाली है। मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने 4.57 अरब रुपए की पलामू पाइपलाइन सिंचाई योजना की 10 फरवरी को नींव रखी है।

पलामू के 96 गांवों की बदलेगी तस्वीर, CM ने रखी 4.57 अरब की सिंचाई योजना की नींव
Krishna Singhसतीश सुमन,मेदिनीनगरWed, 14 Feb 2024 01:03 AM
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दशकों से सुखाड़ की मार झेल रहे पलामू जिले की 80 फीसदी आबादी अब भी कृषि से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी है। आबादी बढ़ने के साथ कृषि क्षेत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन सिंचाई की कारगर व्यवस्था का जिले में घोर अभाव है। इस समस्या का निदान निकालने के लिए प्रदेश के सातवें मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन अपने पहले पलामू दौरे के क्रम में 4.57 अरब रुपए की पलामू पाइपलाइन सिंचाई योजना की 10 फरवरी को नींव रखी। योजना को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भरे जाएंगे जलाशय
इसके तहत पलामू जिले की तीन प्रमुख नदियों सोन, उत्तर कोयल और औरंगा से 31.40 अरब लीटर पानी लिफ्ट कर 15 डैम तथा पाइपलाइन के मार्ग में पड़ने वाले अन्य छोटे-बड़े जलाशय, तालाब एवं आहर में भरा जाएगा। इससे मानसून में जब आंशिक बारिश के बाद ही नदी में बहाव शुरू हो जाए तब पानी को लिफ्ट कर संबंधित जलाशय आदि को भरते हुए कृषि योग्य खेतों तक समय से सिंचाई जल उपलब्ध कराते हुए कृषि कार्य शुरू कराया जा सकेगा।

पलामू में छोटे-बड़े किसानों की संख्या 1.67 लाख
पलामू जिला कृषि विभाग के अनुसार जिले में छोटे-बड़े किसानों की संख्या 1.67 लाख है जबकि कृषि मजदूरों की संख्या लगभग 2.85 लाख है। 2020-21 में मानसून जब समय पर आने के साथ-साथ अच्छी बारिश भी हुई थी जब पलामू के किसानों ने 3.06 लाख टन अनाज पैदा किया था जिसमें धान की मात्रा 1.46 लाख टन थी। सुखाड़ के कारण 2018-19 में धान का उत्पादन महज 0.76 टन ही हो सका था। 2023-23 व 2023-24 में भी मानसून कमजोर रहने से पलामू के किसानों ने सुखाड़ का सामना किया।

पलामू पाइपलाइन योजना का शिलान्यास
पलामू के किसानों की मजबूरी को दूर करने के लिए जिस पलामू पाइपलाइन योजना का शिलान्यास किया है। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार ने कहा कि पलामू की भौगोलिक संरचना काफी जटिल है। पानी को लिफ्ट कर ऊंचाई पर चढ़ाना टेढ़ी खीर है।

ढाल के विपरीत लंबी दूरी तक पानी लाना मुश्किल
पलामू में पूर्व में भी हजारों की संख्या में लिफ्ट व माइक्रो लिफ्ट सिंचाई योजना क्रियान्वित की गई परंतु सफल योजना ढूंढना मुश्किल है। सामाजिक कार्यकर्ता युगल पाल ने कहा कि इस योजना का भी भविष्य फिलहाल उज्जवल नहीं दिख रहा है। क्योंकि ढाल के विपरीत लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में पानी लाना अत्यंत दुष्कर है। लेकिन किसानों को उम्मीद है कि सरकारी तंत्र इच्छाशक्ति दिखाये तो कुछ भी असंभव नहीं है।

25,000 से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर लाभ
जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार के अनुसार पिछले 25 सालों के आंकड़े बताते हैं कि पलामू में कम बारिश की वजह से सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए स्थापित जलाशय अधिकतम 40 प्रतिशत ही भर पाते हैं। इसके कारण सिंचाई क्षमता घटकर 23 प्रतिशत ही रह गई है। पलामू के 15 एक्टिव जलाशयों जिनकी अधिकतम सिंचाई क्षमता 13000 हेक्टर है, को हासिल करने के लिए मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को क्रियान्वित कराने का निर्णय लिया गया है।

25,000 से अधिक परिवारों को लाभ
इसके तहत उत्तरी कोयल, सोन एवं औरंगा नदी से पानी का उठाव कर विभिन्न 15 जलाशयों व मार्ग में पड़ने वाले अन्य छोटे आहर, पोखर, तालाब को भरा जाएगा। पलामू पाइप लाइन सिंचाई योजना के क्रियान्वयन से  25,000 से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। कृषि कार्य और उसपर आधारित आजीविका को संबल मिलेगा।

956 में बिहार लिफ्ट इरिगेशन एक्ट पारित
उल्लेखनीय है कि एकीकृत बिहार में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने 1956 में बिहार लिफ्ट इरिगेशन एक्ट पारित किया था। इसके तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने बिहार लिफ्ट इरिगेशन रूल्स-1978 बनाया था जिसके तहत जलस्रोत से पानी को लिफ्ट कर ऊंचाई वाले क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का काम शुरू हुआ। सरकारी एजेंसी भालको के माध्यम से बिहार में और झालको के माध्यम से झारखंड में लिफ्ट इरिगेशन योजना क्रियान्वित कराई गई परंतु अबतक यह पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाई है।

इन डैम को होगी जलापूर्ति
पलामू पाइपलाइन सिंचाई योजना के क्रियान्वयन से पलामू जिले के आठ प्रखंडों चैनपुर, मेदिनीनगर, सतबरवा, विश्रामपुर, छतरपुर, हुसैनाबाद, हैदरनगर एवं मोहम्मदगंज के 96 गांव लाभान्वित होंगे। रानीताल डैम, टेमराईन डैम, बुटनडूबा डैम, मलय डैम, पोस्तिया नाला डैम, पनघटवा डैम, कचहडवाटांड डैम, कुण्डलवा डैम, वाहेरवधवा नाला डैम, बतरे डैम, धनकई डैम, ताली डैम, सूखनदिया डैम, करमा कलन डैम आदि को पानी आपूर्ति किया जाना है।

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