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अस्पताल में जगह-जगह लगाए बॉक्स, एक अपील और बचा ली 150 लोगों की जान

जमशेदपुर में महंगी दवाओं के लिए भटक रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए एक संस्था ने अनोखा तरीका अपनाया है। संस्था का दावा है कि उसकी पहल से अब तक 150 गरीब लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

अस्पताल में जगह-जगह लगाए बॉक्स, एक अपील और बचा ली 150 लोगों की जान
Krishna Singhहिंदुस्तान,जमशेदपुरTue, 26 Dec 2023 11:14 PM
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जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में महंगी दवाओं के लिए भटक रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए एक संस्था ने अनोखा तरीका अपनाया। संस्था ने उन लोगों के सामने ही हाथ फैलाना शुरू किया जिनके पास इलाज के बाद दवाएं बची होती थीं। यह तरकीब हिट हो गई और अपनों की जान बचाकर घर लौटने वाले तीमारदारों ने इस मुहिम का दिल से समर्थन किया। कई झंझावतों का सामना कर महंगी दवाएं जुटाने वाले लोगों ने बची मेडिसिन को स्वेच्छा से दान करना शुरू किया, ताकि उन गरीब लोगों की जान बचाई जा सके जिनके पास दवाएं खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं। संस्था का दावा है कि दान की दवाओं से अब तक 150 गरीब लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

दवाओं की होती है जांच 
झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन नाम की संस्था ने अभियान को आगे भी जारी रखा है। संस्था ने इसके लिए एमजीएम अस्पताल परिसर में दवा बॉक्स लगाया है। लोगों से अपील की है कि घरों में बची दवाओं को फेंकने के बजाए, उस बॉक्स में डालें। वैसी दवाएं, जिनमें एक्सपायरी डेट बची रहती है, उन दवाओं की जांच के बाद जरूरतमंदों मरीजों के बीच बांटा जाता है। संस्था की ओर से हर हफ्ते उक्त बॉक्स को खोला जाता है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट की मदद से सारी दवाओं की जांच कर जरूरतमंद लोगों के बीच बांटा जाता है। पिछले दो साल से संस्था की ओर से यह काम किया जा रहा है। 

इस पहल से हो रही गरीबों की मदद
एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने वाले वैसे मरीज जो सुदूर ग्रामीण इलाकों से आते हैं। अक्सर उनके पास दवा खरीदने को पैसे नहीं होते हैं। उनको कई दवाएं अस्पतालों से नहीं मिलती हैं। महंगी दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें बॉक्स में डाली गईं दवाओं से बहुत हद तक मदद हो जाती है।

दवाओं को दान करने की अपील 
संस्था के चेयरमैन मनोज मिश्रा ने कहा- अपील का लोगों पर प्रभाव पड़ा है। लोग इस मिशन की अहमियत समझने लगे हैं। लेकिन कई बार लोग इसमें एक्सपायरी दवा डाल देते हैं। ये दवाएं काम की नहीं होती हैं, इसलिए लोगों से अपील है कि केवल उन्हीं दवाओं को बॉक्स में डालें, जिनकी एक्सपायरी डेट खत्म नहीं हुई हो। बॉक्स लगाने और उसे नियमित रूप से खोलकर दवाओं के मिलान की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। कुछ माह पूर्व चाईबासा के एक आदिवासी युवक की जान उक्त बॉक्स की दवा से बचाई गई थी। युवक के परिजनों के पास दवा खरीदने के पैसे नहीं थे। उसे तेज बुखार था। संयोग से बॉक्स में कई दवाइयां डाली गई थीं, जो युवक के काम आ गईं।

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