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हिंदी न्यूज़ झारखंडबोकारोः तीन दिन से कोयला खदान में फंसे चार मजदूर खुद सुरंग बनाकर बाहर निकले, केवल पानी पीकर गुजारा वक्त

बोकारोः तीन दिन से कोयला खदान में फंसे चार मजदूर खुद सुरंग बनाकर बाहर निकले, केवल पानी पीकर गुजारा वक्त

चंदनकियारी (बोकारो)। प्रतिनिधिYogesh Yadav
Mon, 29 Nov 2021 10:41 PM
बोकारोः तीन दिन से कोयला खदान में फंसे चार मजदूर खुद सुरंग बनाकर बाहर निकले, केवल पानी पीकर गुजारा वक्त

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बोकारो के बंद पड़ी पर्वतपुर खदान में अवैध कोयला खनन के दौरान फंसे सभी चार मजदूर रविवार देर रात स्वयं सुरंग बनाकर बाहर निकल गए। वे सभी तीन दिन से खदान में फंसे थे। तीन दिन से जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम खदान में फंसे मजदूरों को निकालने में जुटी थी।

रविवार को घटनास्थल का मुआयना करने के बाद एनडीआरएफ की टीम सोमवार को बीसीसीएल की मशीनों के माध्यम से खदान में सर्च ऑपरेशन चलाने वाली थी। इसी बीच देर रात सभी मजदूर लक्ष्मण रजवार (42 वर्ष), अनादि सिंह(45 वर्ष ), रावण रजवार(46 वर्ष) और भारत सिंह (45 वर्ष) दूसरे हिस्से में सुरंग बनाकर निकल गए। उनके घर पहुंचने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। अपनों को जीवित देख उनकी खुशी का ठिकाना नहीं थी। इसके लिए उन्होंने ग्राम देवता की पूजा कर उन्हें धन्यवाद दिया।

खदान का पानी पीकर गुजारे तीन दिन

खदान में फंसे मजदूरों को तीन दिनों तक खदान का पानी पीकर रहना पड़ा, लेकिन इन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और निकलने के लिए लगातार नया रास्ता बनाने में लगे रहे। सुरंग में फंसे भरत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 9 बजे वे लोग कोयला निकालने के लिए अंदर गए थे। अचानक दोपहर एक बजे चाल धंस गई। उसके बाद रास्ता बंद होता देख उनकी हिम्मत टूट गई।

बाहर से किसी की आवाज भी नहीं मिल रही थी। अपने पास जो भी पानी था उसका उपयोग करते हुए रातभर शांत रहे। शनिवार की सुबह रास्ता साफ करने का प्रयास करने लगे। काफी मेहनत के बाद भी सुरंग का रास्ता साफ नहीं हुआ। इसके बाद चारों लोगों ने  निर्णय लिया कि दूसरे रास्ते की तलाश की जाए।

इसके बाद वैकल्पिक रास्ते को साफ करने के लिए सभी लग गए। रविवार का सुबह से हिम्मत जुटाकर रास्ते को साफ करने लगे। अंतत: रविवार की रात से रास्ता मिलने के आसार नजर आने लगे, तो हिम्मत बढ़ी। जान बचाने के लिए भूखे-प्यासे पूरी रात मेहनत करने के बाद लगभग साढ़े तीन बजे रात में सुरंग के रास्ते से बाहर निकले और घर पहुंचे।

टॉर्च की रोशनी बना सहारा

सुरंग से निकले अनादि सिंह ने बताया मौत को नजदीक खड़ा देख जिंदगी की आस कम हो चुकी थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और सभी से मिलने का सौभाग्य मिला। हादसा होने के बाद हमलोगों ने निर्णय लिया कि अपने पास चार टॉर्च है। इनमें से एक बार एक ही का उपयोग करना है, ताकि अन्य तीन की बैट्री बची रहे, क्योंकि जब तक रोशनी रहेगी तब तक ही काम हो सकेगा।

खदान का पानी पीकर टॉर्च की रोशनी में रास्ता बनाने का काम जारी रखा। रावण रजवार व लक्ष्मण रजवार का कहना है कि खदान के लिए अपनी जमीन दे दी कि रोजगार मिलेगा परन्तु नहीं मिला। घर के पास कोल ब्लॉक है जहां कम ऊपर में ही कोयला है।  जीवनयापन का आसान तरीका दिखा तभी इस काम में लगे। चालू रहता तो इस प्रकार जान जोखिम में डालकर काम करने की कोई जरूरत नहीं थी। बाहर में काम नहीं है। बाहर निकले इन मजदूरों ने मेडिकल टीम से इलाज करने से इनकार किया।

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