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गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचा भविष्य संवार रहीं बैंक सखी महिलाएं, हर महीने कितनी कमाई?

ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं में बैंक सखी अनूठी पहल है। महिलाएं बैंक सखी बनकर ना केवल गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचा रही हैं वरन आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।

गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचा भविष्य संवार रहीं बैंक सखी महिलाएं, हर महीने कितनी कमाई?
Krishna Singhओम प्रकाश पाठक,गढ़वाWed, 14 Feb 2024 11:15 PM
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ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और स्वाबलंबी बनाने के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं में बैंक सखी अनूठी पहल है। घर की चौखट से निकल अब महिलाएं बैंक सखी बनकर गांव में लोगों की बैंकों से जुड़ी जरूरतों का पूरा कर रही हैं। गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने में बैंक सखी मददगार बन रही हैं। गढ़वा के विभिन्न बैंकों से जुड़ी 59 महिलाएं बैंक सखी की जिम्मेवारी निभा रही हैं। उससे न सिर्फ गांव के लोगों को गांव में ही बैंकों से जुड़े काम में सहूलियत हो रही है, बल्कि बैंक सखी भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

अलग पहचान भी बन रही
बैंक सखी बनी महिलाएं बताती हैं कि गांव में लोगों को न सिर्फ बैंकों की सुविधा मिल रही है, बल्कि उनकी ग्रामीण परिवेश में अलग पहचान भी बन रही है। बैंक सखी बनकर वह 15 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह कमीशन से कमाई कर रही हैं। परिवार भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। ग्रामीण परिवेश में लोगों के बीच बैंक से जुड़े कामों को आसान बनाने के लिए महिलाओं को वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया। 

बैंक सखी योजना हो रही लोकप्रिय
महत्वाकांक्षी बैंक सखी योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण देकर गांव के लोगों को पेंशन, मनरेगा का भुगतान, बैंक में खाता खुलवाने सहित अन्य बैंकिंग काम के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए गांव स्तर पर ही व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बैंक संबंधी सभी काम गांव में ही उपलब्ध कराने के लिए बैंक सखी के माध्यम से सीएसपी का संचालन किया जा रहा है।

क्या कहती हैं बैंक सखी
बिशुनपुरा की शुचिता देवी बताती हैं कि वह जेएसएलपीएस की महिला समूह से जुड़कर काम करती थी। उसी क्रम में बैंक सखी बन झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक से जुड़कर काम करने लगी। फिलहाल बैंक के काम के अलावा सरकार की योजनाओं पर भी काम कर रही हैं। गांव और पंचायत के लोगों को बैंक से संबंधित कार्यों के लिए अब बाहर जाना नहीं पड़ता है। काम के एवज में उनका जो कमीशन मिलता है, उससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। 

हर महीने इनकम 
वहीं चुटिया पंचायत की भंवरी गांव की सुषमा वर्मा बताती है कि बैंक सखी बनने के बाद से गांव के लोगों को खाता खुलवाने से लेकर अन्य काम के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। उनके गांव में ही बैंक से जुड़े काम कर दिए जाते हैं। वहीं गांव के लोगों को वित्तीय साक्षरता के बारे में भी जागरूक किया जाता है। सीएसपी के माध्यम से हर महीने करीब 15 हजार रुपए तक की कमाई भी हो जाती है।
 
बैंक सखी बनकर भविष्य संवार रही हैं महिलाएं
झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक के बिशुनपुरा शाखा प्रबंधक पंचम जार्ज सेठ बताते हैं कि ग्रामीण परिवेश की महिलाएं बैंकिंग कार्य में आकर करियर बना रही हैं। यह सचमुच नई पहल है। अन्य महिलाओं के लिए भी बैंक सखी प्रेरणा बन रही हैं। गांव की महिलाएं भी ऐसे कार्यों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

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