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Hindi News झारखंडकोड वर्ड से मिलता था आलमगीर को हिस्सा, M और H का क्या मतलब; डायरी में करोड़ों का हिसाब-किताब

कोड वर्ड से मिलता था आलमगीर को हिस्सा, M और H का क्या मतलब; डायरी में करोड़ों का हिसाब-किताब

ईडी ने मंगलवार को भी कोर्ट में दावा किया कि मंत्री आलमगीर ग्रामीण विकास विभाग में उगाही के सारे पैसे और खुद से जुड़े दस्तावेज अपने पीएस संजीव लाल के जरिए जहांगीर आलम के फ्लैट में रखवाते थे।

कोड वर्ड से मिलता था आलमगीर को हिस्सा, M और H का क्या मतलब; डायरी में करोड़ों का हिसाब-किताब
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीWed, 22 May 2024 07:30 AM
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ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग के ठेकों में घूसखोरी का बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कोर्ट को सौंपे दस्तावेज में बताया है कि मंत्री आलमगीर आलम को ठेकों में कमीशनखोरी का हिस्सा कोड वर्ड के माध्यम से पहुंचता था। उनके लिए कोड वर्ड एम और एच का इस्तेमाल किया जाता था।

डायरी में करोड़ों का हिसाब-किताब
जांच एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि पीएस संजीव लाल के नौकर जहांगीर आलम के फ्लैट से मिली हिसाब-किताब की डायरी से इन तथ्यों का पता चला है। साथ ही सैकड़ों पन्नों की इस डायरी के कुछ पन्नों को साक्ष्य के तौर पर कोर्ट को सौंपा है।

10 दिन में 25 ठेकों का जिक्र
ईडी ने कोर्ट को डायरी का एक पन्ना सैंपल के तौर पर दिया है। इसमें 9 से 19 जनवरी तक के 25 ठेकों का जिक्र किया गया है। हर डिवीजन में किस कंपनी को ठेका दिया गया, कंपनी ने कितना भुगतान किया, भुगतान में कितना हिस्सा मंत्री को गया, पूरा विवरण है। यहां एम कोड के साथ 123 लाख का जिक्र है। वहीं कुल उगाही तकरीबन 223.77 लाख रुपये बताई गई है।

आलमगीर के पैसे जहांगीर के यहां रखवाए
ईडी ने मंगलवार को भी कोर्ट में दावा किया कि मंत्री आलमगीर ग्रामीण विकास विभाग में उगाही के सारे पैसे और खुद से जुड़े दस्तावेज अपने पीएस संजीव लाल के जरिए जहांगीर आलम के फ्लैट में रखवाते थे। साथ ही जहांगीर के यहां से बरामद पूरे 32.20 करोड़ रुपए आलमगीर आलम के होने का दावा किया है। वहीं कोर्ट को यह भी बताया है कि वहां मिले सरकारी दस्तावेज, हिसाब-किताब की डायरी समेत सारी चीजें संजीव लाल ने ही आलमगीर आलम के निर्देश पर रखे थे।

M और H का क्या मतलब
ठेकों में वसूले गए कमीशन के हिसाब किताब में कोड वर्ड एम और एच का मतलब मंत्री आलमगीर आलम था। बरामद डायरी में एम का मतलब था मिनिस्टर और एच का मतलब ऑनरेबल मिनिस्टर। डायरी में कई जगह कोड वर्ड का जिक्र है।

यह भी पढ़िए: डायरी के सिर्फ एक पन्ने में 1 करोड़ से ज्यादा कमीशन का सबूत, आलमगीर आलम को लेकर ईडी का बड़ा दावा

मनीष और उमेश कौन, यह पड़ताल कर रही ईडी
डायरी में मनीष और उमेश नाम के व्यक्ति का भी जिक्र है। एक पन्ने में मनीष को 4.22 करोड़ रुपए और उमेश को 5.95 करोड़ रुपए भुगतान किए जाने की बात लिखी गई है। अब ईडी पड़ताल कर रही है कि डायरी में मनीष और उमेश नाम के जिन व्यक्तियों का जिक्र है, वह आखिर कौन हैं। इनकी कुंडली खंगालने के बाद ईडी इन दोनों से पूछताछ भी करेगी।

डायरी में 1970.05 करोड़ के एलओए का जिक्र
हिसाब-किताब की डायरी में कुल 1970.05 करोड़ के लेटर ऑफ एक्सेप्टेशन (एलओए) का जिक्र है। इसके लिए 59.10 करोड़ और 41.18 करोड़ की राशि का जिक्र है। डीएस कोड को 21.07 करोड़ रुपये के बंटवारे में मिले। 5.95 करोड़ रुपये उमेश, 4.22 करोड़ मनीष, 7.30 करोड़ रुपये मंत्री आलमगीर आलम और 1.33 करोड़ रुपये चीफ इंजीनियर को मिले। इसी डायरी में एक जगह उपलब्ध 21.07 करोड़ रुपये में 11.62 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का जिक्र करते हुए बची राशि 9.45 करोड़ रुपए बताई है।