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Hindi News झारखंडनोटों के पहाड़ मामले में फंसे आलमगीर आलम का मंत्री पद से इस्तीफा, लेट ऐक्शन से किसे मिला फायदा

नोटों के पहाड़ मामले में फंसे आलमगीर आलम का मंत्री पद से इस्तीफा, लेट ऐक्शन से किसे मिला फायदा

सूत्रों की माने तो आलमगीर को एक जून के बाद ही इस्तीफा दे देना था, लेकिन इसमें देरी हुई। एक जून को अंतिम चरण का मतदान संताल क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों गोड्डा, दुमका और राजमहल में था।

नोटों के पहाड़ मामले में फंसे आलमगीर आलम का मंत्री पद से इस्तीफा, लेट ऐक्शन से किसे मिला फायदा
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,रांचीTue, 11 Jun 2024 09:30 AM
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कांग्रेस विधायक दल के नेता और मंत्री आलमगीर आलम ने सोमवार को मंत्रिमंडल और विधायक दल के नेता दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया। आलम ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेज दिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है।

टेंडर मैनेज और कमीशनखोरी मामले में ईडी ने आलमगीर को गिरफ्तार किया था, तब से वे जेल में बंद हैं। इस्तीफा से पहले आलमगीर के विभागों को उनसे वापस ले लिया गया था। बता दें कि आलमगीर के आप्त सचिव के नौकर के यहां ईडी ने छापेमारी में 32.20 करोड़ रुपये बरामद किए थे। आप्त सचिव के दफ्तर से भी कुछ रुपयों की बरामदगी हुई थी। इसके बाद ईडी ने उन्हें समन किया था। दो दिनों तक पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

लेट ऐक्शन का फायदा भी मिला
सूत्रों की माने तो आलमगीर को एक जून के बाद ही इस्तीफा दे देना था, लेकिन इसमें देरी हुई। एक जून को अंतिम चरण का मतदान संताल क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों गोड्डा, दुमका और राजमहल में था। मुस्लिम वोट फैक्टर की वजह से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसका फायदा गठबंधन प्रत्याशी को मिला भी। सात जून को उनके सारे विभाग सीएम के पास चले गए थे। इसके बाद वे बिना विभाग वाले मंत्री रहे गए थे।

आलमगीर के इस्तीफे में चुनाव की वजह से हुई देरी
सूत्रों के अनुसार ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद ही आलमगीर आलम से इस्तीफा लिया जा सकता था, लेकिन लोकसभा चुनाव की वजह से पार्टी और सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। एक जून को अंतिम चरण का मतदान संताल क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों गोड्डा, दुमका और राजमहल में था। मुस्लिम वोट फैक्टर की वजह से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसका फायदा गठबंधन प्रत्याशी को मिला भी। आलमगीर आलम के विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी को बड़ी बढ़त मिली। आलमगीर के जेल जाने से आगामी विधानसभा सत्र के लिए बैठक बुलाने समेत अन्य कार्यवाही के लिए विधायक दल के नेता की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आलाकमान अब नए विधायक दल के नेता का चयन करेगा।

झारखंड सरकार जल्द करेगी कैबिनेट विस्तार
झारखंड सरकार जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार करेगी। इसमें झामुमो कोटे से कल्पना सोरेन और कांग्रेस कोटे से नए चेहरे को मौका मिल सकता है। मंत्री बनने के रेस में महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह सबसे आगे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें टिकट देने के बाद वापस ले लिया गया। ऐसे में उन्हें मौका मिल सकता है। मुस्लिम कोटे से मंत्री आलमगीर आलम के हटने पर दूसरे चेहरे जामताड़ा विधायक डॉ इरफान अंसारी पर भी पार्टी दांव खेल सकती है। झारखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए मंत्री पद के लिए आदिवासी चेहरे को भी पार्टी तरजीह दे सकती है। 12 जून को कांग्रेस पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में मंत्री और विधायक दल के नेता के नाम पर चर्चा होने की संभावना है।