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Hindi News झारखंडचीरूडीह नरसंहार कांड में 49 साल बाद आठवें दोषी को सजा, शिबू सोरेन समेत 14 हो चुके हैं बरी

चीरूडीह नरसंहार कांड में 49 साल बाद आठवें दोषी को सजा, शिबू सोरेन समेत 14 हो चुके हैं बरी

घटना के बाद पुलिस ने सात हथियार बरामद किए थे। रमाकांत दत्ता के पास से बंदूक बरामद की गई थी, जिसका लाइसेंस जय कुमार सेन के नाम पर निर्गत था। बंदूक की फॉरेंसिक जांच कराई गई थी।

चीरूडीह नरसंहार कांड में 49 साल बाद आठवें दोषी को सजा, शिबू सोरेन समेत 14 हो चुके हैं बरी
punjab and haryana high court
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,जामताड़ाThu, 13 Jun 2024 11:14 AM
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झारखंड के जामताड़ा व्यवहार न्यायालय स्थित एडीजे-वन संतोष कुमार की अदालत ने बुधवार को बहुचर्चित चीरूडीह नरसंहार के मामले में आठवें दोषी रमाकांत दत्ता (75 वर्ष) को उम्रकैद की सजा सुनाई। घटना के 49 साल बाद यह फैसला आया। न्यायालय में सजा की सुनवाई पूरी होने के बाद रमाकांत को जामताड़ा जेल भेज दिया गया। रमाकांत जामताड़ा के श्यामपुर गांव का रहनेवाला है। उसे कोर्ट से निर्गत लाल वारंट के आधार पर पुलिस ने 08 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया था। वह दो महीने से जामताड़ा जेल में बंद है।

नरसंहार का मामला 23 जनवरी 1975 को नारायणपुर थाना में दर्ज किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि बांसपहाड़ी, रजैया, चीरूडीह, तरनी, मुचियाडीह तथा रसियाभिट्ठा गांव के निकट नदी किनारे घातक हथियार के साथ महाजनी प्रथा के खिलाफ बलवा करने के उद्देश्य से नाजायज मजमा लगाया गया था। इस दौरान 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने सात हथियार बरामद किए थे। रमाकांत दत्ता के पास से बंदूक बरामद की गई थी, जिसका लाइसेंस जय कुमार सेन के नाम पर निर्गत था। बंदूक की फॉरेंसिक जांच कराई गई थी।

शिबू सोरेन, दशरथ मुर्मू समेत 14 हो चुके हैं बरी
इस मामले में कुल 28 आरोपी बनाए गए थे, लेकिन 22 के खिलाफ कोर्ट में ट्रायल हुआ। चूंकि घटना के बाद छह आरोपी गायब हो गए थे। मामले में 12 मार्च 2008 को जामताड़ा के एडीजे-वन के न्यायालय ने 14 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया था। बरी होनेवालों में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, खूबलाल पंडित, छोटू सोरेन, जगन्नाथ पंडित, श्यामलाल हेंब्रम, दशरथ मुर्मू सहित अन्य शामिल हैं।

12 मार्च 2008 को जयदेव टुडू, नथनियल हेम्ब्रम, सत्यनारायण पोद्दार, जयकुमार सेन, झगरू पंडित, सिकंदर मियां को उम्रकैद की सजा मिली थी। सजा पाने वालों की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है, जो लंबित है। हालांकि हाईकोर्ट ने सजा पाने वालों को जमानत दी है।