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झारखंड: कोनार नहर के पानी से 45 साल बाद खेतों में आई हरियाली, 404 किलोमीटर है नहर की लंबाई

माहुरी गांव के शिक्षित किसान जितेंद्र कुमार ने बताया कि नहर में पानी देखकर मन में प्लान आया कि क्यों नहीं इससे पटवन कर खेती की जाए। इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य किसानों से अपना प्लान साझा किया।

झारखंड: कोनार नहर के पानी से 45 साल बाद खेतों में आई हरियाली, 404 किलोमीटर है नहर की लंबाई
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,बगोदर(गिरिडीह)Thu, 22 Feb 2024 10:51 PM
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कोनार नहर के पानी से आखिरकार पहली बार खेतों में पानी पहुंच गया है। इसकी वजह से गिरिडीह जिले में मानसून आधारित धान की खेती के बाद परती रहने वाले खेतों में इन दिनों हरियाली दिख रही है। खेतों में गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसलें लहलहा रही हैं। बगोदर प्रखंड के माहुरी गांव के किसानों ने कोनार नहर के पानी से खेतों में पटवन की है।

माहुरी गांव के शिक्षित किसान जितेंद्र कुमार ने बताया कि नहर में पानी देखकर मन में प्लान आया कि क्यों नहीं इससे पटवन कर खेती की जाए। इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य किसानों से अपना प्लान साझा किया। फिर दर्जनों किसानों ने अपने खेतों में गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसलें लगाईं। उन्होंने बताया कि जिस खेत में अभी हरियाली देखने को मिल रही है वह मॉनसून आधारित धान की खेती के बाद परती रहता था।

ज्यादा आउटलेट नहीं होने से परेशानी
किसानों का कहना है कि कोनार नहर में पानी देखकर हमलोगों ने खेती करना तो शुरू कर दिया मगर पटवन के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि ज्यादा आउटलेट नहीं रहने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। सभी जगह आउटलेट होता तो डीजल पंप से पटवन करने की विवशता नहीं रहती। किसान जितेंद्र का कहना है कि आउटलेट है मगर सही जगह में नहीं रहने के कारण सभी किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है।

1978-79 में शुरू हुआ था नहर का निर्माण
एकीकृत बिहार के समय में 1978-79 के समय कोनार नहर निर्माण कार्य की शुरुआत हुई थी। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ने परियोजना की आधारशिला रखी थी। निर्माण को पूरा करने के लिए 11 करोड़ रुपए की लागत तय की गई थी। वर्तमान में 2176 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही जा रही है। कोनार सिंचाई परियोजना दक्षिण दिशा से बहकर उत्तर की तरफ प्रवाहित होकर उपरोक्त तीन जिलों गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो में 62,895 हेक्टेयर जमीन सिंचित करेगी। इसमें खरीफ फसल 49 हजार 270 एवं रबी फसल 13626 हेक्टेयर है। इसके लिए अंडरग्राउंड एवं ओपेन नहर का निर्माण किया गया है।

नहर की कुल लंबाई 404 किलोमीटर
अंडरग्राउंड नहर की कुल लंबाई लगभग 41 किलोमीटर है, जबकि चौड़ाई 6.5 मीटर और ऊंचाई भी 6.5 मीटर है। नहर की कुल लंबाई 404 किलोमीटर है। बाद में अलग राज्य झारखंड का निर्माण हुआ तब तत्कालीन रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में नहर रिलाइनिंग का कार्य शुआ हुआ था। साल 2019 में कोनार नहर में पानी छोड़ा गया था लेकिन कुछ घंटे बाद ही नहर के तटबंध का एक हिस्सा पानी के दबाव के कारण बह गया। बाद में इसकी मरम्मत की गई। हालांकि जगह-जगह आउटलेट नहीं होने के कारण सभी किसानों को नहर के पानी का लाभ नहीं मिल रहा है। 

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