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झारखंड के डाकघर पर निर्भर पश्चिम बंगाल के 3 गांवो का पता, क्या है वजह

तार सेवा पहुंचानी हो तो उस इलाके के पिनकोड के बिना डाक पता अधूरा है। लेकिन झारखंड की सीमा पर पश्चिम बंगाल के तीन गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों के घरों पता आज भी झारखंड के इस डाक घर पर ही निर्भर है।

झारखंड के डाकघर पर निर्भर पश्चिम बंगाल के 3 गांवो का पता, क्या है वजह
Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,जामताड़ाMon, 26 Feb 2024 10:49 PM
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कहीं भी अगर डाक या तार सेवा पहुंचानी हो तो उस इलाके के पिनकोड के बिना डाक पता अधूरा है। लेकिन झारखंड की सीमा पर पश्चिम बंगाल के तीन गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों के घरों पता आज भी झारखंड के डाक घर पर ही निर्भर है। जामताड़ा जिले के मिहिजाम सब डाकघर से पश्चिम बंगाल के तीन गांवों धांगुड़ी, डोमदाहा और कासीडंगाल गांव के लोगों का का पिन कोड का पता चलता है। ये तीनों गांव पश्चिम बंगाल के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित हैं।

बताया जाता है कि 257 वर्ष पूर्व ब्रिटिश काल के दौरान भारत में शुरू हुई डाक सेवा काल से ही इन गांवों का डाक पता राज्य विभाजन के बाद भी झारखंड में रह गया। डाक विभाग की स्थापना के बाद से ही इन तीनों गांवों को झारखंड के अंतर्गत मिहिजाम डाकघर में शामिल किया गया। हालांकि धांगुड़ी, डोमदाहा व कासीडंगाल गांव बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल उपखंड के तहत सालानपुर प्रखंड में स्थित है। यहां की सभी प्रशासनिक गतिविधियां पश्चिम बंगाल में हैं, लेकिन डाकघर झारखंड के अधिकार क्षेत्र में है। इसके चलते पत्र, मनीआर्डर, बैंक चेक बुक, सरकारी सेवा दस्तावेज, नौकरी में शामिल होने के पत्र से लेकर हर चीज झारखंड राज्य में घूम कर तीन गांवों के लोगों के हाथों तक पहुंचती है। इससे पत्र पहुंचने में देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। इसलिए स्थानीय लोग लंबे समय से इन गांवों को निकट के हिंदुस्तान केबल्स या रूपनारायणपुर उपडाकघर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।

आसनसोल मंडल के सहायक डाकघर अधीक्षक ने सालानपुर प्रखंड विकास अधिकारी को पत्र लिख कर इन गांवों के लगभग 650 निवासियों के लिए एक नया डाकघर शुरू करने की सलाह दी है। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि वोटर कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक आदि दस्तावेज कहीं प्रस्तुत करने में दिक्कत होती है। पश्चिम बंगाल में जाओ तो लोग झारखंड का बताते है और झारखंड में जाओ तो लोग हमें पश्चिम बंगाल का बताते हैं। ऐसे में या तो हमें पश्चिम बंगाल में ही पूरी तरह शामिल किया जाए या फिर झारखंड में। वहीं वर्षों से डाक सेवा पहुंचा रहे मिहिजाम उपडाकघर के पोस्टमैन विष्णु मिस्त्री ने कहा कि बंगाल के गांव की चिट्ठी हमें बांटनी पड़ती है। डोमदाहा, धांगुड़ी, कासीडंगाल गांव पश्चिम बंगाल में पड़ता है। इनका सभी दस्तावेज बंगाल का है लेकिन डाक पता झारखंड का है। इससे पत्र देरी से पहुंचता है।

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