ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News झारखंड105 साल पुराना जमशेदपुर का बिष्टूपुर राम मंदिर अब होगा ऑनलाइन, बनाई जाएगी नई वेबसाइट

105 साल पुराना जमशेदपुर का बिष्टूपुर राम मंदिर अब होगा ऑनलाइन, बनाई जाएगी नई वेबसाइट

प्रबंध समिति के मुताबिक, नई वेबसाइट बनाई जाएगी, ताकि प्रदेश सहित देश-विदेश के दक्षिण भारतीय लोग भी अपटूडेट रह सकें। वेबसाइट पर मंदिर के हर कार्यक्रम और गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध होगी।

105 साल पुराना जमशेदपुर का बिष्टूपुर राम मंदिर अब होगा ऑनलाइन, बनाई जाएगी नई वेबसाइट
Devesh Mishraहिन्दुस्तान,जमशेदपुरWed, 21 Feb 2024 10:22 PM
ऐप पर पढ़ें

झारखंड के लौहनगरी के 105 साल पुराने बिष्टूपुर राम मंदिर की कीर्ति अब देश-विदेश तक फैलेगी। एक क्लिक पर लोग यहां होने वाले हर कार्यक्रम को जान सकेंगे, बल्कि झारखंड के इस औद्योगिक नगरी से कोसों दूर बैठकर अपनी सहभागिता भी निभा सकेंगे। दक्षिण भारतीय समुदाय की अगुवाई में संचालित इस आंध्रभक्त राम मंदिर को अब हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर कार्यकारिणी समिति ने इसका विस्तार से खाका तैयार किया है। मंदिर की स्थापना वर्ष 1919 में की गई थी।

प्रबंध समिति के मुताबिक, नई वेबसाइट बनाई जाएगी, ताकि प्रदेश सहित देश-विदेश के दक्षिण भारतीय लोग भी अपटूडेट रह सकें। वेबसाइट पर मंदिर के हर कार्यक्रम और गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध होगी। इस काम को पूरा करने के लिए नई कमेटी ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सदस्यों तथा आईटी क्षेत्र से जुड़े तेलुगु समाज के युवाओं की मदद ली जा रही है। आईटी क्षेत्र में काम करने में समुदाय से जुड़े दिग्गजों की मदद से वेबसाइट के लिए सदस्य भी नियुक्त किए जाएंगे, जो समय-समय पर वीडियो से लेकर सभी गतिविधियों को वेबसाइट पर अपलोड करेंगे।

मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष जम्मी भास्कर ने बताया कि 2019 में ही आंध्र भक्त श्री राम मंदिर की वेबसाइट बनाई गई थी, लेकिन वह कई साल से अपटूडेट नहीं है। मंदिर की वेबसाइट को अपटूडेट करने की योजना है। आवश्यकता हुई तो तकनीकी समिति का निर्माण होगा। राम मंदिर की गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके माध्यम से तेलुगु समाज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की कोशिश होगी।

नेताजी की पहल टाटा स्टील से मिली थी जमीन
इस राम मंदिर को जमीन नेताजी सुभाष बोस चंद्र की पहल पर टाटा स्टील ने दी थी। नेताजी टाटा स्टील की कामगार यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष थे। वर्ष 1919 में झोपड़ी में चल रहे इस मंदिर से जुड़े लोगों ने नेताजी से इस बारे में आग्रह किया था। पहले इस मंदिर को 120 वर्ग फीट जमीन उपलब्ध कराई गई, बाद में 180 वर्गफीट जमीन और मिली। इसी जमीन पर वर्ष 1929 में इस भव्य मंदिर की नींव रखी गई थी। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें