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आप मार्क्सवादी हो क्या, पत्रकार के सवाल पर दिशोम गुरु ने किसे बताया था अपना प्रेरणा स्रोत?

आप मार्क्सवादी हो क्या, पत्रकार के सवाल पर दिशोम गुरु ने किसे बताया था अपना प्रेरणा स्रोत?

संक्षेप: दिनमान के संपादक रहे जवाहरलाल कौल ने जब शिबू सोरेन से मुलाकात की तो लंबी बातचीत के बाद उन्होंने पूछा- आप मार्क्सवादी हो क्या, जानिए क्या कहा था गुरु जी ने?

Wed, 29 Oct 2025 04:58 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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जब सिबू सोरेन से पत्रकार ने पूछा- आप मार्क्सवादी हो क्या? जानिए उन्होंने क्या कहा होगा? ये बात झारखंड के गठन से करीब 25 साल पहले की है। जब शिबू सोरेन राज्य में आदिवासियों की हथियाई गई जमीन महाजनों से वापस दिलाने जैसे तमाम तरह के आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान टूंडी इलाके में उनका दबदबा बन चुका था। वहां दिशोम गुरु अपनी सरकार चला रहे थे।

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उनके कामों की चर्चाएं टुंडी क्षेत्र से निकलकर देशभर में सुर्खियां बटोर रही थीं। बड़े-बड़े पत्रकार-संपादक शिबू सोरेन के काम के तरीकों को जानने और उनसे बात करने के लिए राज्य का दौरा कर रहे थे। इस कड़ी में दिनमान के संपादक रहे जवाहरलाल कौल भी शामिल थे

आप मार्क्सवादी हो क्या?

जवाहलाल कौल साल 1976 के दौरान टूंडी में शिबू सोरेन से मिलने पहुंचे थे। दोनों की मुलाकात का जिक्र अनुज सिन्हा द्वारा लिखी गई किताब- ‘दिशोम गुरु, शिबू सोरेन’ में दर्ज है। कौल और गुरुजी के बीच काफी लंबी बात हुई। बातचीत के दौरान कौल ने पूछा- आप मार्क्सवादी हो क्या? इस सवाल पर शिबू सोरेन ने कहा- 'नहीं।' शिबू सोरेन ने बताया- ‘मार्क्स को नहीं पढ़ा है। जो भी थोड़ा पढ़ा है, वह गांधी और जयप्रकाश को पढ़ा है। उन दोनों से प्रेरणा मिलती है।’

शिबू सोरेन पर गांधीवादी प्रभाव की वजह

शिबू सोरेन पर गांधी जी के प्रभाव की एक बड़ी वजह उनके पिता को माना जाता है। क्योंकि, उनके शिक्षक पिता ‘सोबरन सोरेन’ पक्के गांधीवादी थे। वो गांव-गांव जाकर शिक्षा का प्रचार करते थे। उन्होंने आजादी के दौरान लड़ाई में भी भाग लिया था। चुंकि वो महाजनी प्रथा का खुलकर विरोध करते थे, इसलिए उनके पिता को महाजन नापसंद करते थे, जिसका दुखद परिणाम उनकी मौत साबित हुई।

पिता की हत्या के बाद बदल गई दुनिया

शिबू सोरेन के पिता की हत्या महाजनों द्वारा कर दी गई थी। तब उनकी उम्र महज 13-14 साल थी, जिसके बाद उन्होंने किताबों से रिश्ता तोड़कर समाज से जोड़ लिया था। उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया कि वो महाजनी प्रथा को पूरी तरह खत्म करके मानेंगे। इसके बाद शिबू सोरेन ने महाजनों के खिलाफ धान काटो और जमीन वापस दिलाने का अभियान चलाया, दो कई बार हिंसक रूप अख्तियार कर लेता था।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta
IIMC दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। खबरों की दुनिया के अलावा साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना और गाने सुनना पसंद है। और पढ़ें
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