Hindi NewsJharkhand NewsSimdega NewsSimdega District 117 358 Toilets Built Yet Open Defecation Persists
अरबों खर्च हुए पर अब भी अधिकतर लोग खुले में ही करते हैं शौच

अरबों खर्च हुए पर अब भी अधिकतर लोग खुले में ही करते हैं शौच

संक्षेप:

सिमडेगा जिले में अब तक 1,17,358 निजी शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब भी खुले में शौच करने को विवश हैं। 72% लोग शौचालय का उपयोग करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। शौचालयों की खराब स्थिति और उपयोग में कमी से स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।

Nov 18, 2025 11:06 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सिमडेगा
share Share
Follow Us on

सिमडेगा, प्रतिनिधि। सिमडेगा जिले में अब तक 1,17,358 निजी शौचालय बनाए गए हैं, जबकि 22 सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं। निजी शौचालय बनाने में 1,40,82,96000 रुपए खर्च किए जा चुके हैं। जबकि सार्वजनिक शौचालय बनाने में भी करोड़ा रुपए खर्च हुए हैं। साथ ही सिमडेगा को वर्ष 2019 में ही खुले में शौच से मुक्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद जिले ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर लोग आज भी खुले में ही शौच करने को विवश हैं। खूले में शौच करने के मामले में शहरी क्षेत्र भी अछूता नहीं है। हालांकि एनएफएचएस के सर्वे के अनुसार 72 प्रतिशत लोग शौचालय का उपयोग करते हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। आज स्थिति यह है कि अधिकांश ग्रामीण शौचालय बनने के बावजूद खुले में ही शौच करने जाते हैं। इनमें से अधिकतर शौचालय उपयोग करने के लायक नहीं है। अधिकतर शौचालय का निर्माण इतना घटिया हुआ है कि किसी में छत नहीं है, तो किसी में दरवाजा नहीं लगा है। पानी का कनेक्शन भी नहीं है। कई शौचालय में तो शॉप्टिक टैंक भी नहीं है। वहीं जिले में बने 22 सार्वजनिक शौचालय में से कई का हाल खराब है और साफ-सफाई की कमी है। इधर विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में शौच करने से जल स्रोत दूषित होते हैं। बीमारियां फैलती हैं और पर्यावरण अस्वस्थ रहता है। वहीं शौचालय का नियमित उपयोग करने से संक्रमण कम होते हैं। स्वास्थ्य बेहतर होता है और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनता है। क्या कहते हैं विभाग के ईई विभाग के ईई मुकेश कुमार ने कहा कि जिले में 1,17,358 घरों में शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन लोग शौचालय का उपयोग नहीं करना चाहते हैं। शौचालय के उपयोग को लेकर ग्रामीणों की मानसिकता बदलना जरूरी है। खुले में शौच पर रोक लगाने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा।