पोषाहार राशि नहीं मिलने से उधार के भरोसे नौनिहालों का निवाला
सिमडेगा के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार का भुगतान नहीं होने से सेविकाएं और सहायिकाएं आर्थिक संकट में हैं। 24,000 बच्चों को पोषण देने का जिम्मा निभा रहीं सेविकाएं खुद कर्ज में डूब गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि भुगतान नवंबर तक किया गया, लेकिन सेविकाओं का कहना है कि उन्हें अक्टूबर से कोई राशि नहीं मिली।

सिमडेगा, प्रतिनिधि। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है। पिछले कई महीनों से पोषाहार की राशि का भुगतान नहीं होने के कारण जिले की 967 सेविकाएं और सहायिकाएं भारी मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं। आलम यह है कि 24 हजार बच्चों को कुपोषण से बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाली सेविकाएं अब खुद कर्ज के बोझ तले दब गई हैं। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित 3 से 6 वर्ष तक के करीब 24,000 बच्चों को मीनू के अनुसार अंडा, हलवा, बादाम, गुड़ और खिचड़ी खिलाना अनिवार्य है। राशि के अभाव में सेविकाओं को अपनी जेब से या स्थानीय दुकानदारों से दस से 15 हजार रुपये तक का राशन उधार लेना पड़ रहा है।
लगातार बढ़ते बकाये के कारण अब दुकानदारों ने भी राशन देने में आनाकानी शुरू कर दी है। जिससे केंद्रों के संचालन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि जिले में पोषाहार की राशि नियमित दी जा रही है। नवंबर माह तक का पोषाहार राशि का वितरण कर दिया है। भाउचर प्राप्त होते ही एवं राज्य से फंड मिलते ही शेष माह का पोषाहार राशि का वितरण कर दिया जाएगा। भुगतान को लेकर सरकारी दावों और हकीकत में दिख रहा है अंतर पोषाहार भुगतान को लेकर विभाग और सेविकाओं के बयानों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में नवंबर माह तक का भुगतान कर दिया गया है और केवल दिसंबर व जनवरी का भाउचर व फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान लंबित है। वहीं दूसरी ओर जिले की कई सेविकाओं का कहना है कि उन्हें अक्टूबर के बाद से कोई राशि नहीं मिली है। उनके अनुसार, नवंबर, दिसंबर, जनवरी और अब फरवरी का भी भुगतान बकाया है।
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