Simdega News: महंगाई की मार, बिगड़ रहा घरों का बजट
Simdega News: सिमडेगा में महंगाई ने आम लोगों के बजट को बिगाड़ दिया है। रसोई के खर्च में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसमें चीनी, उड़द दाल और हरी सब्जियों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। कई परिवार अब पहले के मुकाबले अधिक राशि खर्च कर रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है।

Simdega News: सिमडेगा, प्रतिनिधि। महंगाई की लगातार बढ़ती मार से आम लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है। बढ़ती महंगाई के कारण रसोई का खर्च संभालना परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में चीनी समेत कई जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतों में तेजी आई है। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि आमदनी के मुकाबले रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 20 दिनों में चीनी की कीमत में करीब 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। चीनी 50 रुपये से बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसका असर मिठाई कारोबार पर भी पड़ा है। कई कारोबारियों ने मिठाइयों के दाम में 10 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी है। कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमत बढ़ने से मिठाई के भाव बढ़ाना मजबूरी हो गई है। वहीं पिछले तीन महीने में उड़द दाल, सरसों तेल और रिफाइंड की कीमतों में करीब 20 से 25 फीसदी तक तेजी बताई जा रही है। चावल के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। घर का राशन खरीदने में पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। सूखे मेवा की कीमतों में भी करीब 200 रुपये प्रति किलो तक तेजी आई है। फिलहाल कई सूखे मेवा करीब 450 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। वहीं पिस्ता की कीमत करीब 1500 रुपये किलो तक पहुंच गई है। दुकानदारों के अनुसार मांग और आपूर्ति के अलावा थोक बाजार में कीमत बढ़ने का असर खुदरा बाजार पर पड़ रहा है.
हरी सब्जियों ने भी बढ़ाई परेशानी
हरी सब्जियों की कीमत भी लोगों को राहत नहीं दे रही है। सिमडेगा बाजार में अलग-अलग हरी सब्जियां 20 से 60 रुपये किलो तक बिक रही हैं। प्याज करीब 48 रुपये और लहसुन करीब 200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। सब्जी, दाल और तेल के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि पहले एक तय राशि में सप्ताह भर का राशन और सब्जी खरीद ली जाती थी। लेकिन अब उसी सामान के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। महीने के अंत में बजट बिगड़ जाता है और दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है।


