सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने बजट को सराहा, तो विपक्ष ने किया खारिज
सिमडेगा में राज्य सरकार का आम बजट पेश होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल इसे गरीबों और युवाओं के हित में बता रहा है, जबकि विपक्ष ने इसे दिशाहीन और जिले की अनदेखी वाला करार दिया है। बजट को लेकर दोनों पक्षों में बहस जारी है।

सिमडेगा, प्रतिनिधि। राज्य सरकार का आम बजट पेश होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। सत्तारूढ़ दल के विधायक जहां इसे गरीब, किसान, महिलाओं और युवाओं के हित वाला बता रहे हैं। वहीं विपक्ष के पूर्व विधायकों ने बजट को दिशाहीन और जिले की अनदेखी वाला करार दिया है। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद बजट को लेकर बहस गर्म हो गई है। सत्ता पक्ष इसे संतुलित और विकासोन्मुख बजट बता रहा है। जबकि विपक्ष ने इसे जिले की जरूरतों को न समझने वाला दस्तावेज कहकर खारिज कर दिया है। बजट पर नेताओं की प्रतिक्रिया... आम बजट स्वागत योग्य है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जनजातीय कल्याण और आधारभूत संरचना पर केंद्रित योजनाओं ने स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगा दी है। यह बजट जन-आकांक्षी वाला बजट है। यह बजट आंकड़ों का मायाजाल नहीं धरातल पर बदलाव लाने वाला है। सिमडेगा जैसे आदिवासी बहुल जिले के लिए कृषि, पेयजल और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रावधान संजीवनी का काम करेंगे। सड़क उन्नयन और सिंचाई परियोजनाओं का सीधा लाभ हमारे जिले के सुदूरवर्ती गांवों को मिलेगा। कृषि उपकरणों पर अनुदान और पशुपालन को बढ़ावा देने की योजना किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक होगी। तकनीकी शिक्षा और स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए आवंटित राशि से जिले के युवाओं को घर के करीब बेहतर अवसर मिलेंगे। -भूषण बाड़ा, विधायक सिमडेगा आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और विशेष विकास कार्यक्रमों के लिए की गई घोषणाएं सीधे तौर पर सिमडेगा की सामाजिक संरचना को मजबूती प्रदान करेंगी। बजट का विश्लेषण करने पर समझ में आया कि राज्य सरकार ने समावेशी विकास का जो मॉडल पेश किया है, उसमें सिमडेगा की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा गया है। भले ही जिले का नाम बजट पटल पर नहीं है लेकिन नीतियों की गूंज आने वाले समय में जिले की सड़कों, अस्पतालों और खेतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। -नमन विक्सल कोंगाड़ी, विधायक कोलेबिरा यह बजट कागज पर विकास का वादा करता है, जमीन पर नहीं। सिमडेगा जैसे आदिवासी जिलों के लिए कोई सीधी घोषणा नहीं की गई। किसानों, युवाओं और छोटे व्यापारियों को वास्तविक राहत नहीं मिली। पलायन रोकने की नीति स्पष्ट नहीं है। यह बजट सिर्फ भाषणों का खेल लगता है, जनता की जरूरतों का नहीं। -विमला प्रधान, पूर्व विधायक
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