त्याग और तपस्या का समय है चालीसा काल: बिशप
सिमडेगा में ख्रीस्तीय विश्वासियों का चालीसा काल बुधवार से आरंभ हुआ। विशेष धर्मविधि समारोह गिरजाघरों में आयोजित किए गए। बिशप बिंसेंट बरवा ने राखबुध पर तीन मिस्सा पूजा का आयोजन किया। उन्होंने त्याग-तपस्या और कृपा का महत्व बताते हुए ईश्वर के पास लौटने का संकल्प लेने की सलाह दी।

सिमडेगा, प्रतिनिधि। ख्रीस्तीय विश्वासियों का राखबुध के साथ ही चालीसा काल बुधवार से आरंभ हो गया। राखबुध के अवसर पर धर्मप्रांत के सभी गिरजाघरों में विशेष धर्मविधि समारोह संपन्न की गई। सामटोली के संत अन्ना महागिरजाघर परिसर में राखबुध के मौके पर तीन मिस्सा पूजा का आयोजन किया गया। पहली मिस्सा बिशप बिंसेंट बरवा की अगुवाई में संपन्न हुआ। जबकि दूसरा मिस्सा विजी फा इग्नासियुस टेटे की अगुवाई में एवं तीसरा मिस्सा फा प्रदीप केरकेट्टा, फा नीलम राकेश मिंज आदि पुरोहितों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मौके पर बिशप बिंसेंट बरवा ने कहा कि चालीसा काल त्याग-तपस्या और कृपा का उपयुक्त समय है।
चालीसा काल में अपने जीवन में व्याप्त सभी बुराईयों और कमजोरियों को त्याग कर ईश्वर के पास लौट आने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि हम सेवाकार्य कर और प्रार्थनामयी जीवन व्यतीत कर अधिक पुण्य कमाएं। हमारे जीवन में ख्रीस्तीयता और मानवता भाव जागृत करने के लिए ईश्वर को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने गुनाहों के क्षमा करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को नि:स्वार्थ भाव से भिक्षाटन करना, त्याग तपस्या करना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान के तहत बिशप ने राख की आशीष दी। उसके बाद समारोह में उपस्थित सभी विश्वासियों के माथे पर क्रुस चिह्न अंकित की गई। चालीसा काल के मौके पर खजूर की डाली से बने राख से मुख्य अनुष्ठाता ने आशीष प्रदान किया। तथा जीवन के क्षण भंगुरता के प्रतीक स्वरूप सभी मतावलंबियों के मस्तक पर टीका लगाया गया।
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