
1916 से श्रीरामरेखा धाम में लग रहा है कार्तिक पुर्णिमा मेला
सिमडेगा में चार नवंबर से श्रीरामरेखा धाम में राजकीय रामरेखा महोत्सव सह धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम शुरू होगा। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। श्रद्धालु पवित्र गुफा में पूजा अर्चना कर सुख और शांति की कामना करेंगे। मेले का समापन 6 नवंबर को होगा।
सिमडेगा। कार्तिक पुर्णिमा के मौके पर श्रीरामरेखा धाम में पहली बार चार नवंबर से राजकीय रामरेखा महोत्सव सह धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम शुरु होगा। वैसे तो श्रीरामरेखा धाम में लगने वाले कार्तिक पुर्णिमा मेला का इतिहास काफी पुराना है। लेकिन पहली बार भगवान श्रीराम के चरणों से पवित्र इस भूमि में राजकीय महोत्सव का आयोजन होगा। बताया जाता है कि प्रसिद्ध एतिहासिक स्थल श्रीरामरेखा धाम में कार्तिक पुर्णिमा के मौके पर सन 1916 में रामरेखा मेला के साथ शुरु हुआ था। मेला की शुरुआत बीरू गढ़ के तत्कालीन राजा स्व. हुकूम सिंहदेव ने किया था। मेला से पूर्व दर्शन पूजन के लिए पवित्र गुफा में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगभग 17 वीं शताब्दी में ही प्रारंभ हुआ था।

तब पवित्र गुफा में स्वयंभू शिवलिंग और राम नाम का ध्वनि निकलने वाला अदभुत शंख के दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालु यहां पहुंचते थे। बीरु राज परिवार द्वारा धाम के व्यवस्था संचालन की जिम्मेवारी निर्वहन करते हुए स्व. राजा हुक्म सिंह देव ने 1916 में राधा-कृष्ण के धातु का प्रतिमा स्थापित करवाया। और इसी वर्ष के कार्तिक पूर्णिमा में सर्वप्रथम रामरेखा मेला का आयोजन किया गया। इसके बाद सन् 1942 में ब्रह्मलीन श्रीश्री 1008 श्री स्वामी जयराम प्रपन्नाचार्य जी रामरेखा बाबा जिनके रोम-रोम में भक्ति का समावेश था। उन्होंने रामरेखा मेला को पूर्णतया धार्मिक परिवेश में बदला। उनके प्रयास से ही कार्तिक पूर्णिमा को रामरेखा मेला की जगह अखंड हरिनाम यज्ञ, सत्संग प्रवचन आदि का अनुष्ठान प्रारंभ कराया गया। पूज्य बाबा के आलौकिक अध्यात्मिक शक्ति का प्रभाव दिनों-दिन श्रद्धालुओं में बढ़ता गया। वर्तमान में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर झारखंड राज्य ही नहीं बिहार, यूपी, छतीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा आदि राज्य के श्रद्धालु लाखों की संख्या में पूर्णिमा स्नान के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों की सेवा में ना केवल रामरेखा धाम विकास समिति के सदस्य वरन् प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न राजनैतिक दल के कार्यकर्ता योगदान देते हैं। रामरेखा के प्रमुख दर्शनीय स्थल: मुख्य मंदिर-पवित्र गुफा में स्थित मंदिर में भगवान श्रीराम, जानकी माता और भ्राता लक्ष्मण, राधा-कृष्ण, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, माता सुभद्रा, पौराणिक शिव लिंग, श्याम वर्ण शंख के अलावे गुरु गद्दी में ब्रह्मलीन पूज्य देवराहा बाबा, ब्रह्मलीन पूज्य रामरेखा बाबा की प्रतिमा, गुफा के छत में भगवान द्वारा खींची गई लकीर जिसके कारण धाम को रामरेखा धाम के नाम से जाना जाता है। धाम परिसर में श्रद्धालु पंचममुखी हनुमान मंदिर, गरुड स्तंभ, गुप्त गंगा, धनुष कुंड, सीता चौक, सीता चूल्हा, अग्नि कुंड, समाधि स्थल का दर्शन करते है। श्री रामरेखा धाम में चार दिवसीय कार्तिक पूर्णिमा मेला कल से: श्री रामरेखा धाम में तीन दिवसीय कार्तिक पूर्णिमा मेला 4 नवंबर से शुरु होगा। मौके पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहाड़ की तलहटी पर उमड़ेंगे। साथ ही पवित्र गुफा में पुजा अर्चना कर सुख,शांति की कामना करेंगे। 6 नवंबर को प्रात: आठ बजे नाम समाप्ति, हवन पूजन, विसर्जन, भंडारा महाप्रसाद का वितरण के साथ मेला का समापन होगा। -

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