
सिमडेगा में विदेशी कुत्ते पालने का शौक बढ़ा
सिमडेगा में विदेशी नस्ल के कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। लोग कुत्ते पालने में नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे हमलों के मामले बढ़ रहे हैं। प्रशासन को जागरूकता फैलाने और उचित...
सिमडेगा, प्रतिनिधि। कुत्ते पालना आज के समय में शौक ही नहीं बल्कि खुद को पशुप्रेमी बताने का जरिया भी बन गया है। सिमडेगा में भी विदेशी कुत्ते पालने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विदेशी नस्ल के कुत्ते पालने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक के समय कुत्तों के साथ घुमने वालों की तादाद भी बढ़ रही है। शहर में डॉबरमैन, जर्मन शेफर्ड, ब्राजिलियन शेफर्ड, डैश हाउंड, पग, लेब्राडोर, अमरीकन बुलडॉग, पमेलियन, रॉटविलिर, ग्रेडडेन, ब्लैक शेफर्ड, लासाएपसो, बीगल, गोल्डन रिट्रीवर जैसे विदेशी नस्ल के कुत्ते काफी संख्या में पाले जा रहे हैं।

ज्यादातर लोग ऐसे कुत्ते पालते हैं जो इंसानों के साथ आराम से घुलमिल जाएं। साथ ही ट्रेंड करने में आसान हो और खतरनाक होने के साथ-साथ अपने मालिक के प्रति वफादार भी हों। कुछ ऐसे भी नस्ल पाले जा रहे हैं जिस प्रजाति के कुत्ते पालने पर रोक है। बावजूद विभागीय अनदेखी के कारण लोग खतरनाक प्रजाति के कुत्ते पाल रहे हैं। शहर में विदेशी नस्ल के कुत्तों के प्रशिक्षण के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। विदेशी नस्ल के कुत्तों को या तो रांची अथवा अन्य जिलों में ले जाकर ट्रेनिंग दी जाती है या फिर पशुप्रेमी द्वारा खुद से इन्हें ट्रेंड किया जाता है। जिले में कुत्तों को सिर्फ एंटी रेबीज इंजेक्शन देने की ही सुविधा है। इसके अलावा इनके ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग इन्हें घरों में रखते हैं। परंतु इनके पालन से जुड़े बुनियादी नियमों की अक्सर अनदेखी करते हैं। कुत्तों को न तो प्रशिक्षण दिया जाता है, न ही इनके लिए सुरक्षा उपाय जैसे मजबूत पट्टा, मुँह पर थूथन लगाना या सार्वजनिक जगहों पर सतर्क निगरानी रखी जाती है। परिणामस्वरूप, राहगीरों, बच्चों और यहां तक कि मालिकों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जागरुकता की आवश्यकता स्थानीय लोगों का कहना है कि शहरी क्षेत्र में जर्मन शेफर्ड, पिटबुल और डॉबरमैन जैसे कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन को जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को नियमों के पालन की जानकारी देनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि खतरनाक नस्लों को बिना उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा के पालना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है। यदि समय रहते कड़ी निगरानी और जागरुकता नहीं दिखाई गई तो यह गंभीर घटनाओं का कारण बन सकता है। क्या कहते हैं नगर प्रबंधक नप क्षेत्र में पालतू कुत्तों को पालने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही पालतु कुत्ता बिना लाइसेंस के बाहर चलते हुए नजर आया तो, उसके मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पालतू कुत्तों के लाइसेंस की सालाना फीस निर्धारित है ताकि शहर को साफ सुथरा रखने में मदद मिल सके। -आकाश डेविड सिंह, नप सिमडेगा

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




