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तप और क्षमाभाव से होकर गुजरता है आत्म शुद्धि का मार्ग: जैन आचार्य

तप और क्षमाभाव से होकर गुजरता है आत्म शुद्धि का मार्ग: जैन आचार्य

संक्षेप:

सिमडेगा में जैन भवन में पर्यूषण महापर्व का समापन अष्ट दिवसीय अखंडपाठ और क्षमापना पर्व के आयोजन के साथ हुआ। आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मशुद्धि के लिए तप और क्षमा...

Aug 28, 2025 11:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सिमडेगा
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सिमडेगा, जिला प्रतिनिधि। जैन भवन में पर्यूषण महापर्व का समापन गुरुवार को अष्ट दिवसीय अखंडपाठ की पूर्णाहुति और क्षमापना पर्व के आयोजन के साथ हुआ। मौके पर आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है, कायर इसे धारण नहीं कर सकते। क्षमा से अंतःकरण शुद्ध होता है और शुद्ध हृदय में ही धर्म का वास होता है। स्वामी जी ने कहा कि संवत्सरी पर्व हमें यही सिखाता है कि शत्रु के प्रति भी पुत्रवत प्रेमपूर्ण का व्यवहार करना चाहिए। आचार्य जी ने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मशुद्धि का मार्ग तप और क्षमाभाव से होकर ही गुजरता है।

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सभा में पंडित वासुदेव गौतम और विद्याबंधु शास्त्री ने भी गुरु और क्षमा की महत्ता बताई। मौके पर आचार्य पद्मराज जी द्वारा संपादित सुंदरकांड पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मौके पर आठ दिन तक सिर्फ जल पर तप करने वाली पायल जैन और रश्मि जैन का विशेष अभिनंदन किया गया। जबकि एकासना करने वाले उषारानी जैन, सुनीता जैन, प्रीति बंसल और अरिहंत जैन को भी सम्मानित किया गया। साध्वी वसुंधरा जी ने मधुर भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सभा के दौरान प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया और अंत में मंगलपाठ व प्रसाद वितरण के साथ महापर्व का समापन हुआ। कार्यक्रम में जैन सभा के अध्यक्ष प्रवीण जैन, गुलाब जैन, बिमल जैन, मनोज जैन, पवन जैन, मोतीलाल अग्रवाल, प्रेमचंद जैन, राजकुमार जैन, ओमप्रकाश जैन, संजय शर्मा, सुरेश शर्मा, राजेश अग्रवाल, पिंकुल मातनहेलिया, शंकर सेन सहित कई लोग उपस्थित थे।