Hindi NewsJharkhand NewsSimdega NewsBrhaalin Ramrekha Baba A Pillar of Faith and Service in Simdega
संत ही नहीं आजाद हिंद फौज के सैनिक भी थे रामरेखा बाबा

संत ही नहीं आजाद हिंद फौज के सैनिक भी थे रामरेखा बाबा

संक्षेप:

सिमडेगा में ब्रहालीन रामरेखा बाबा की कमी महसूस की जाती है। उन्होंने लगभग सात दशक तक लोगों की सेवा की और धर्म के प्रति जागरूक किया। जयराम प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और संतों के साथ भ्रमण करते हुए रामरेखाधाम में सेवा की। वे क्षेत्र में एक प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्व बन गए।

Tue, 4 Nov 2025 11:06 PMNewswrap हिन्दुस्तान, सिमडेगा
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सिमडेगा। रामरेखाधाम में लगभग सात दशक तक निवास करते हुए लोगों को धर्म के प्रति जागरुक करने वाले ब्रहालीन रामरेखा बाबा की कमी आज भी खलती है। ब्रहालीन रामरेखा बाबा एक अभिभावक की तरह लोगों की सेवा करते थे और यही कारण है कि जिले के जर्रे जर्रे में रामरेखा बाबा रस बस गए है। आडिसा राज्य के संबलपुर जिला स्थित कुलुंडी गांव में 28 अगस्त 1896 में जन्मे जयराम प्रपन्नाचार्य जी महाराज उर्फ ब्रहालीन रामरेखा बाबा किशोरावस्था में ही स्वाधिनता आंदोलन में भाग लिया था। वे सुभाषचंद्र बोस के आजाद हिंद सेना में भी शामिल होकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी।

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सांसारिक मोह माया में मन नहीं लगने के कारण सन 1926 में वे एक वाम मार्गी साधू के साथ घर छोड़कर निकल पड़े और साधू संतो के साथ भ्रमण करते हुए 1935 में द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे। यहां रामानुज सम्प्रदाय के पांचवे गुरु स्वामी जनार्दन आचार्य से उन्होंने दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद जनार्दन आचार्य जी के शरीर त्यागने के बाद छठे गुरु के रुप में स्वामी ओहबल प्रपन्नाचार्य उर्फ देवराहा बाबा सम्प्रदाय के उत्तराधिकारी बनें। उनके ब्रहालीन होने के बाद सातवें गुरु के रुप में उनके गुरु भाई जयराम प्रपन्नाचार्य जी महाराज पदस्थापित हुए। सन 1942 में बीरु गढ के तत्कालिन राजा धर्मजीत सिंह के निमंत्रण पर जयराम प्रपन्नाचार्य जी महाराज बीरु पहुचे और राजा साहब के आग्रह पर वे रामरेखा में ही रुक गए और रामरेखाधाम के महंत का दायित्व संभाला। इसके बाद लगातार रामरेखाधाम में रहकर उन्होंने वनवासियो की सेवा की और जयराम प्रपन्नाचार्य जी महाराज रामरेखा बाबा के नाम से विख्यात हो गए।