
सिमडेगा तक बिछेगी रेलवे लाइन, आजादी के बाद यहां पहली बार पहुंचेगी ट्रेन
झारखंड के ऐसे जिले, जो आजादी के बाद भी रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं, प्रस्तावित योजना के तहत वहां रेललाइन बिछायी जानी है। हाल में इस संबंध में मंथन चल रहा है।
झारखंड के ऐसे जिले, जो आजादी के बाद भी रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं, प्रस्तावित योजना के तहत वहां रेललाइन बिछायी जानी है। वर्तमान में इस संबंध में मंथन चल रहा है। योजना अंतर्गत राउरकेला से 30 किलोमीटर बीरमित्रपुर होते हुए सिमडेगा तक रेललाइन बिछानी है। इसके बाद इस लाइन को लोहरदगा लाइन में जोड़ दिया जाएगा। बीरमित्रपुर से सिमडेगा तक लाइन जुड़ते ही गुमला जिला में भी रेल नेटवर्क पहुंचेगा और लोरहदगा-टोरी से भी जुड़कर एक नया रेल नेटवर्क के रूप में तब्दील हो जाएगा। इससे विशेष कर आदिवासी बहुल जिले जो रेल नेटवर्क से नहीं जुड़े है, वे भी जुड़ जाएंगे। इससे रोजगार के संसाधन भी उपलब्ध होंगे और छूटे हुए जिलों के लिए सुलभ और सस्ता आवागमन का माध्यम भी उपलब्ध हो जाएगा।

वर्तमान में हटिया से राउरकेला तक जुड़ी है बंडामुंडा लाइन
वर्तमान में हटिया से राउरकेला तक बंडामुंडा रेललाइन जुड़ी हुई है, जो सिमडेगा मुख्यालय से अछूती है। हटिया-राउरकेला लाइन लोधमा खूंटी जिला, कर्रा, गोविंदपुर, बक्सपुर, पकरा, खुरखुरा, महाभोंग, सिमडेगा जिला का बानो, टाटी, ओड़गा से होकर गुजरती है। वहीं रांची से लोहरदगा के बीच रेललाइन है, लेकिन गुमला जैसे मुख्यालय भी रेलमार्ग से नहीं जुड़े हैं।
दक्षिण पूर्व रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समित के सदस्य अरुण जोशी ने बताया कि भारत सरकार की योजना है। गुमला-सिमडेगा जैसे जिलों को जोड़ने की योजना है। बिरमित्रापुर से सिमडेगा को जोड़ने और सिमडेगा से लोहरदगा जोड़ने की योजना है। राज्य सरकार और भारत सरकार से मांग है कि इस योजना को जल्द ही धरातल पर उतारा जाए, ताकि ग्रामीण-आदिवासी जनता को भी लाभ मिले।
इस मामले की जानकारी देते हुए रांची के डीआरएम करुणानिधि सिंह ने बताया कि रेल लाइन बनाने को लेकर मंथन चल रहा है। लेकिन यह हमारे रेलमंडल के अधीन नहीं है। जो योजना धरातल पर उतरेगी, उसकी पहली सूचना दक्षिणपूर्व रेलवे मुख्यालय और संबंधित डिविजन के पास आएगी।





